दियारा कच्ची शराब – आबकारी विभाग की जरा सी चूक, बिगाड़ सकता है पुलिस द्वारा बना-बनाया माहौल

कहीं विधानसभा चुनाव में खलल न डाल दे दियारी की कच्ची शराब का उत्पादन
धनघटा का दियारा कच्ची शराब के नाम से पहचाना जाता है

धनघटा। दीपक कुमार कश्यप
धनघटा का दियारा हमेशा से ही पुलिस क लिए सर दर्द रहा है। कभी यहां अपराधियों की शरण स्थली तो इन दिनों कच्ची शराब का व्यापक उत्पादन पुलिस के लिए नासूर बन चुका है। ऐसे में कहीं आगामी विधानसभा के चुनाव में धनघटा के दियारा में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब की हो रही उत्पादकता खलल न डाल दे, यह प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। स्थानीय पुलिस द्वारा आदर्श आचार संहिता लगने के बाद से जो हनक अपराधियों के अन्दर पैदा की जा रही है, कहीं आबकारी विड्टााग की हल्की सी चूक पूरी हनक और योजना पर पानी न फेर दे, यह भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती भरा प्रश्न है। अब सवाल यह उठता है कि यदि विधानसभा चुनाव में कच्ची शराब के उत्पादन और मारपीट का मामला प्रकाश में आया तो फिर इसका जिम्मेदार कौन, पुलिस या आबकारी विभाग?
धनघटा का दियारा कभी स्थानीय अपराधियों से लेकर आजमगढ, अम्बेड़करनगर, बेलघाट, गोरखपुर जनपद के बड़े ही नामचीन अपराधियों के छिपना का एक महफूज स्थान हुआ करता था। कभी यहां आतंक का पर्याय बने अमरजीत गैंग की दस्तक हुआ करती थी। लेकिन इस दिनों धनघटा का दियारा कच्ची शराब के व्यापक उत्पादन के नाम से जाना जाने लगा है। धनघटा क्षेत्र के दर्जनों स्थान स्थानों पर बन रहे कच्ची शराब इसका सीधा उदाहर हैं। क्षेत्र के लोगों की माने तो दियारा से ही पूरे इलाके में कच्ची शराब की सप्लाई की जाती है।
पकड़ कर की जाती है खानापूर्ति
आए दिन आबकारी विभाग या स्थानीय पुलिस छापेमारी कर कुछ लोगों को पकड़ कर कुछ कच्ची शराब को दिखाकर अपना कोरम विभाग द्वारा पूरा कर दिया जाता है। सूत्रों की माने तो उक्त कच्ची शराब बनाने और बेचने वाले कारोबारियों को पकड़ने के बाद ही निजि मुचलके पर छोड़ कर कार्रवाई की इतिश्री कर दी जाती है। जबकि लोगों की माने तो वहीं कारोबारी पुलिस या आबकारी विभाग से चन्द समय में छूटने के बाद वापस अपने उसी धंधे में लग जाते हैं। विशेषज्ञों की माने तो इसपर गम्भीर कार्रवाई हो और इन्हें गम्भीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाय तो निश्चित तौर पर उनके हौशले पराश्त होंगे।
ईंट भट्ठों के अलावा दर्जनों गांव में पनप रहा अवैध कच्ची शराब का कारोबार
धनघटा थाना क्षेत्र के अधिकांश ईंट भट्ठों के अलावा दर्जनों गांव में कच्ची शराब का अवैध धंधा व्यापक पैमाने पर फल-फूल रहा है। सूत्रों की माने तो धनघटा थाना क्षेत्र के हैंसर और पौली और नाथनगर ब्लाक के दर्जनों गांव में ऐसे धंधेबाज है जिनका बेहतर सम्बंध भी आबकारी विभाग से स्थापित हो चुका है। जिसके चलते उक्त धंधेबाजों पर नकेल कसना आबकारी विभाग के लिए चुनौती बनता चला जा रहा है।
थाने की पुलिस को करना पड़ रहा आबकारी विभाग का कार्य
आदर्श आचाचर संहिता लागू होते ही जहां अपराधियों की धर पकड़ के साथ ही क्षेत्र की शान्ति व्यवस्था कायम करना वैसे ही पुलिस के लिए महत्पूर्ण कार्य माना जाता है। वहीं कच्ची शराब के अवैध धंधों पर लगाम लगाने के लिए आबकारी विभाग की तैनाती ही केवल उसी कार्य के लिए की जाती है। ऐसे में आए दिन क्षेत्र में शान्ति व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस द्वारा सूचना मिलने पर कच्ची शराब के धंधेबाजों पर कार्रवाई की जा रही है। जबकि आबकारी विभाग द्वारा केवल कोरम पूरा कर अपनी पीट अपने ही हाथ से थपथपाई जा रही है।
कच्ची शराब का उत्पादन किसी भी दशा में रोका जाना है। इसके लिए सभी थानाध्यक्षों के अलावा खासकर आबकारी विभाग को निर्देशित किया गया है। सम्बंधित थानाध्यक्षों व आबकारी विभाग द्वारा आए दिन छापेमारी भी की जा रही है। चुनाव को शान्तिपूर्ण माहौल में निपटाया जाएगा। किसी भी दशा में कच्ची शराब का कारोबार नहीं होने दिया जाएगा।

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