क्या जितिन प्रसाद लोकसभा चुनाव में सीट छोड़ कर भग जायेगे

इमरान सागर 

कांग्रेस की गाड़ी पर हुई सपा सबार, क्या हो पाएगा,क्षेत्र का बेड़ा पार

तिलहर,शाहजहाँपुर:-अखिलेश यादव के कंधो पर बैठ कर प्रदेश में अब तक की सबसे बेहतरीन सरकार चलाने वाली समाजवादी पार्टी को भी रास्ट्रीय स्तर पर खत्म होती कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़ा! देश में चल रही मोदी लहर का खौफ कहें या समाजवादी पार्टी में लगभग तीन माह से चल रहे आपसी झगड़ो का चुनाव पर असर पड़ने का खौफ, मामला कुछ भी रहा हो लेकिन आखिर गठबंधन कर जहाँ सपा ने १३३ बिधान सभा तिलहर सीट की टिकिट के लिए सपा समर्थको मे चल रहे के विवाद पर बिराम लगा दिया तो वही क्षेत्र को जनपद में पुराने राजघराने से नाम प्रस्ताबित कर कांग्रेस में नई जान फूकने का कार्य किया है!
क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियों में सपा और कांग्रेस की ओर से जितिन प्रसाद का नाम जुड़ने के साथ प्रत्याशियो में एक नाम और बढ़ गया वोटो की हिस्सेदारी में! बताते चले कि जितिन प्रसाद जनपद की एक एैसे शख्सियत घराने का पर्सन है जिसका भारतीय राजनीत में लम्बे समय तक खासा प्रभाव रहा हैं! इससे पूर्व में भी जितिन प्रसाद कोयला  एंव पेट्रोलियम मंत्री रह चुके है जब वे धरौरा सीट को जीते थे लेकिन उससे पहले एक बार जनपद में सासंद भी रहे हैं यह शायद अभी हर शख्स भले जानता है! जितिन प्रसाद को जहाँ उनके घराने के साथ साथ उनकी स्वंय की राजनीतिक भी खासी पहचान है!
अपने संसदीय एंव मंत्रीय कार्यकाल में जितिन प्रसाद ने धरोहरा के लिए कुछ भी किया हो लेकिन जनपद नगर एंव उसके क्षेत्रो के लिए कोई कार्य करते नज़र नही आए! सांसद बन कर दिल्ली में अधिक रहने का बहाना आखिर वोटरो का न पच पाने के कारण ही धरोहरा की ओर निकला उचित समझा श्री प्रसाद ने!
***समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन पर १३३ बिधान सभा तिलहर से प्रत्याशी के रूप में हालांकि जितिन पर वोटरो की निगाहे जरूर टिकी है क्यूंकि बसपा से दो बार विधायक रहे रोशन लाल वर्मा(अब भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी) एंव बहुजन समाज पार्टी के पूर्व में मंत्री रहे प्रत्याशी अवधेश कुमार वर्मा जो पिछले दो कार्यकाल के दौरान ददरौल बिधान सभा के लिए क्या कर पाए यह स्थानीय वोटर से छिपा नही है!
अपने सांसद काल में जनपद को कोई सौगात नही दिलापाने वाले जितिन प्रसाद ने क्षेत्र से बाहर निकल कर धरौहरा की धरोहर भले ही संवार दी हो लेकिन स्थानीय तौर पर चर्चा है कि बिधान सभा चुनाव के कुछ समय बाद ही लोक सभा तुनाव हैं जिसमें जितिन प्रसाद कांग्रेस हाई कमान के आदेश पर क्षेत्र की बिधायकी छोड़ किसी भी क्षेत्र से सासंद चुनाव के लिए निकल तो नही भागेगे! एैसा समझा जाता है कि आखिर १३३ बिधान सभा क्षेत्र के वोटर के साथ प्रत्याशियों के पास वफा के नाम पर कुछ नही नज़र आता है। कभी प्रदेश की सत्ता का बिधायक न होने का रोना रो कर क्षेत्र को अब तक विकास से अछूता ही रखा गया!
***सूत्रो की माने तो बिधान सभा के चुनाव मैदान में १३३ बिधान सभा से राजनीतिक पार्टियों से उतरने वाले विभिन्न प्रत्याशियों में किसी हद तक जितिन प्रसाद की चर्चा जोरो पर जरूर है लेकिन इससे भी इंकार नही कि कहीं एैसा तो नही कि आने वाले लोक सभा चुनाव में पार्टी के आदेश पर तिलहर को फिर छोड़ कर कहीं अन्य निकल जाए! हांलाकि इस संशय का अभी कोई हल नज़र तो नही आता परन्तु उसके बाद भी वोटर की शंकी निगाह से बचना जितिन के लिए आसान नही होगा!

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