राजनीति में ये भी करेगे क्या मोदी जी के सिपहसालार ?, फिर भी राहुल गाँधी ने दिया देशभक्ति का परिचय

आफताब फारुकी.

आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर राहुल गांधी जी को इस सरकार ने चौथी पंक्ति पर बैठने का स्थान निश्चित कर उन्हें छठी पंक्ति पर बैठाया गया. सरकार के हाकिम और हुक्मरानों ने ये पंक्ति का खेला खेल कर अपनी एक विचित्र मानसिकता का परिचय दिया वही दूसरी तरफ राहुल गांधी ने इस बात को बिना कोई तवज्जो दिये अपनी पवित्र देशभक्ति कि भावना का परिचय देते हुए गणतंत्र दिवस समारोह का सम्मान करते हुए पूरे निष्ठा के भाव के साथ समारोह में शामिल हो कर ऐसे लोगो को मुंहतोड़ जवाब देने का काम किया ,

साहेब ये जो छठीं पंक्ति में बैठे राहुल गांधी हैं ना ये सिर्फ राहुल गांधी नहीं हैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष हैं, उस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष, जिस कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ने का काम किया, जिस कांग्रेस ने अपने 1929 के अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित किया जिसकी बदौलत ही आज गणतंत्र दिवस समारोह जैसे आयोजन होना संभव हो रहा है  और हाँ आज जिन विदेशी महानुभाव अतिथियों को आप बड़े गर्व के साथ देश की उपलब्धियों की झांकिया दिखा रहे थे वो उपलब्धियां भी उसी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अथक प्रयासों से साकार हो सकी हैं और उसी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष को आज आपने गणतंत्र दिवस समारोह जैसे राष्ट्रीय समारोह में निजी आत्मसुख के लिए छठी पंक्ति पर बैठाया

आपने राहुल गांधी के साथ गुलाम नबी आजाद को भी छठी पंक्ति पर ही बैठाया? साहेब गुलाम नबी आजाद सिर्फ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक नेता भर नहीं हैं वो राज्यसभा जिसे उच्च सदन कहा जाता है उस सदन में विपक्ष के नेता भी हैं लोकतंत्र में विपक्ष की अहमियत आपके लिए भले ही न हो लेकिन लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले इस देश के एक एक नागरिक को सत्ता और विपक्ष दोनो की जिम्मेदारियों पर पूरा विश्वास है

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