कांग्रेस के वापसी का शुभ सन्देश हो सकती है बेल्लारी सीट

अनीला आज़मी

डेस्क. कांग्रेस के लिए बेल्लारी सीट पर वापसी दक्षिण भारत में उनकी वापसी के शुभ संकेत हैं। एक समय बेल्लारी सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन खनन कारोबारी रेड्डी बंधुओं के भाजपा के साथ खड़े हो जाने के कारण भाजपा वहां मजबूत हो गई। कांग्रेस ने 14 सालों के वनवास के बाद बेल्लारी सीट पर वापसी की है।

कांग्रेस उम्मीदवार वीएस उग्रप्पा ने रिकार्ड पांच लाख से अधिक वोट पाए और दो लाख से अधिक से जीते हैं। कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की रतलाम, पंजाब की गुरुदासपुर, राजस्थान की अजमेर और अलवर के साथ बेल्लारी की सीट उपचुनाव में जीती है। बेल्लारी के साथ कर्नाटक उपचुनाव के पूरे नतीजों को देखे तो गठबंधन की राजनीति मजबूत हुई है। हालांकि बेल्लारी के अलावा कांग्रेस ने अन्य चार उपचुनाव बिना गठबंधन अकेले दम पर जीते थे।

मुल्क का मूड बदल चुका है: कांग्रेस  

कर्नाटक उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस में जोश भरने वाले हैं। प्रवक्ता मनीष तिवारी का कहना है कि नतीजों से संकेत साफ हैं कि मुल्क का मूड बदल चुका है। तिवारी ने इसे छोटी दिवाली और काली मां के पूजन से जोड़कर कर कहा कि कर्नाटक के शुभ समाचार बताते हैं कि वहां के लोगों ने नकारात्मक शक्तियों का वध किया है। कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को तीन में दो लोकसभा और दो विधानसभा जिताकर राज्य सरकार को मजबूती दी है। एक लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा बहुत कम मार्जिन से चुनाव जीती है।

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