प्रदेश सरकार की आकस्मिक मेडिकल सेवा चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट, एम्बुलेंस कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

फारुख हुसैन 

खमरिया खीरी। जहां प्रदेश सरकार द्वारा आम जनता के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके चलाई गई इमरजेंसी मेडिकल सेवाए प्रदान की गई थी वहीं जिम्मेदार संस्था के भ्रष्ट अधिकारियों की मनमानी के चलते इमरजेंसी मेडिकल सेवाएं दम तोड़ रही है। सूत्रों की माने तो जिम्मेदार संस्था के उच्चधिकारियो के दुर्व्यवहार व शोषण के कारण एंबुलेंस के कर्मचारी स्वयं को पीड़ित व शोषित महसूस कर रहे हैं। एंबुलेंस के ईएमटी व पायलटों ने संस्था के अपनी समस्याओं और शोषण के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा जनहित में क्षेत्र की आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं के लिए चलाई गई 102, 108 एंबुलेंस सेवाएं भ्रष्टाचार के चलते दम तोड़ रही हैं। एंबुलेंस वाहनों पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और इनके पायलटों ने जिले में तैनात सभी एंबुलेंस सेवा के संचालन एवं देख रेख के जिम्मेदार जिला प्रभारी रमाशंकर शुक्ल पर शोषण करने, पैसों की मांग करने, शराब की मांग करने के साथ दुर्व्यवहार व अभद्रता का आरोप लगाया है। उनके अनुसार उनकी मांगों को पूरा न करने पर कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्रों में भेज कर, अनावश्यक रिपोर्टिंग की मांग, फोन पर गाली गलौज, छोटी-छोटी बातों के लिए जिला मुख्यालय बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया हैं।

ईसानगर, नकहा व धौराहरा में तैनात सभी एंबुलेंस के ईएमटी व पायलटों ने अपनी संस्था जीवीके ईएमआरआई के उच्च अधिकारी सीओ, एचआर को अपने शिकायती पत्र से सूचित कर न्याय की गुहार लगाई। संस्था के उच्च अधिकारियों द्वारा कई दिनों बाद भी किसी प्रकार की जांच या कार्यवाही न करने के कारण आज सभी 16 कर्मचारियों ने अपने हस्ताक्षर का शिकायती पत्र मुख्यमंत्री के पोर्टल के माध्यम से भेज कर न्याय की गुहार लगाई है। इसके अलावा कर्मचारियों ने बताया क्षेत्र में 108 एंबुलेंस पायलट ना होने के कारण 2 दिन से खड़ी है। जिसके लिए भी मनमानी करते हुए जिला प्रभारी ने अभी तक कोई पायलट की व्यवस्था नहीं की है। इससे जनहित के लिए चलाई गई आकस्मिक चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए एंबुलेंस सेवाएं स्वयं दम तोड़ती नजर आ रही हैं।

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