सीबीआई रार – सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई केंद्र पर तल्खी, फैसला सुरक्षित

अनीला आज़मी

नई दिल्ली. सीबीआई में अफसरों के विवाद मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से कड़ाई से सवाल पूछे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद दो टॉप अफसरों के बीच की ऐसी लड़ाई नहीं थी जो रातोंरात सामने आई। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं था कि सरकार को सिलेक्शन कमिटी से बातचीत किए बिना सीबीआई निदेशक की शक्तियों को तुरंत खत्म करने का फैसला लेना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ आलोक वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज की अपील पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

इससे पहले गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि केंद्र ने खुद माना है कि ऐसी स्थितियां पिछले 3 महीन से पैदा हो रही थीं। बेंच ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने सीबीआई डायरेक्टर की शक्तियों पर रोक लगाने से पहले चयन समिति की मंजूरी ले ली होती तो कानून का बेहतर पालन होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की कार्रवाई की भावना संस्थान के हित में होनी चाहिए

गुरुवार को सीबीआई विवाद की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के तेवर सख्त नजर आए। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सरकार ने 23 अक्टूबर को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की शक्तियां वापस लेने का फैसला रातोंरात क्यों लिया? चीफ जस्टिस ने पूछा, ‘जब वर्मा कुछ महीनों में रिटायर होने वाले थे तो कुछ और महीनों का इंतजार और चयन समिति से परामर्श क्यों नहीं हुआ?’

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि असाधारण स्थितियां पैदा हुईं। उन्होंने कहा कि असाधारण परिस्थितियों को कभी-कभी असाधारण उपचार की आवश्यकता होती है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘सीवीसी का आदेश निष्पक्ष था, दो वरिष्ठ अधिकारी लड़ रहे थे और अहम केसों को छोड़ एक दूसरे के खिलाफ मामलों की जांच कर रहे थे।’

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