जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई)टीकाकरण अभियान 25 फ़रवरी से शुरु

संजय ठाकुर

मऊ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नियमित टीकाकरण के तहत आगामी 25 फरवरी सेजापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) टीकाकरण अभियान की शुरुआत की जाएगी, तथा सही ही प्रचार-प्रसार के माध्यम से जापानी बुखार के लक्षण और बचाव के बारे जनसमुदाय को जागरूक किया जायेगा।

मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में गत दिवस हुयी बैठक में बताया गया कि 25 फरवरी से 8 मार्च तक पूरे जिले में 1 से 15 वर्ष के बच्चों का जापानी बुखार (जेई) का टीका लगाया जायेगा। वहीं अभियान के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी किया जायेगा। हेल्थ मैनेजमेंट एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम, उत्तर प्रदेश 2018-19 की आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2018 से दिसंबर 2018 तक उत्तर प्रदेश में 9 से 11 माह के 30.26 लाख बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि मऊ जिले में 43,224 बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण किया जा गया है।

एसीएमओ एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एम लाल ने बताया कि इस अभियान के लिए लगभग2.7 लाख बच्चों का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही माइक्रोप्लान बनाकर सत्र के माध्यम से प्रत्येक ब्लॉक में मोबलाइज किया जाएगा। इस अभियान में स्कूल से लेकर गांव के बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में चलाये गए एमआर टीकाकरण अभियान में जो बच्चे लक्ष्य से छूट गए थे उन सभी एमआर टीकाकरण भी इस अभियान के साथ ही किया जायेगा ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्त हो सके।

डॉ. एम लाल ने बताया कि खास बात यह है कि लोगों में जागरूकता, साफ़-सफ़ाई और अपने स्वास्थ्य के बारे में सजग होने को लेकर जनपद से अभी तक डेंगू, स्वाइन फ्लू व मस्तिष्क ज्वर के एक भी मरीज नहीं पाए गए। जापानी बुखार के लक्षणों एवं बचाव के बारे में उन्होंने बताया कि जापानी इन्सेफेलाइटिस फैलाने वाले कुछ संभावित विषाणु जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु, संक्रमण के पश्चात बीमारी का कोई विशेष इलाज नहीं है। लेकिन बीमारी का शुरू में ही पता चल जाने से उपचार जल्दी किया जाए तो ऐसी स्थिति में पीड़ित बच्चे या व्यक्ति की जान को बचायी जा सकता है।

समय से टीकाकरण, साफ-सफाई से रहना, गंदे पानी के संपर्क में आने से बचना ही बीमारी के महत्वपूर्ण बचाव हैं। मच्छरों से बचाव, घरों के आसपास पानी न जमा होने देना। बच्चों को ताज़ा, बेहतर एवं संतुलित खान-पान देना। उन्होंने बताया कि बच्चों में यह रोग ज्यादा दिखने को मिलता है,ऐसे में कोशिश करें कि बच्चों को पूरे कपड़े ही पहनाएं ताकि उनका शरीर ढका रहे।

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