दुनिया की 65 प्रतिशत आबादी “सही अर्थ me न्याय” से वंचित

 आदिल अहमद

: एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर के लगभग 5 अरब 10 करोड़ लोग न्याय के सही अर्थ तक पहुंच से वंचित हैं। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार जस्टि फ़ार टास्क फ़ोर्स की ओर तैयार की गयी रिपोर्ट हेग में वर्ल्ड् जस्टिस फ़ोरम में 29 अप्रैल को जारी की गयी थी।
रिपोर्ट में अन्याय की महामारी का चिन्ह बताया गया है जो दुनियाभर के देशों विशेषकर निर्धनों को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
जस्टिस टॉस्क फ़ोर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में न्याय की व्यवस्था 5 अरब 10 करोड़ लोगों के मामले हल करने में विफल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चाहे वह हिंसा का शिकार हों, तलाक़ चाहते हों, नौकरी पर परेशान किए जाने का मामला हों, कर्ज़े से निपट रहे हों या कारोबारी परमिट हो, वह ख़र्चे और जटिल कार्य शैली की वजह से रुक जाते हैं, उन्हें अविश्वास का भी सामना होता है कि उनके साथ न्याय होगा या नहीं।
जस्टि फ़ार टॉस्क फ़ोर्स में अर्जीन्टीना, नीदरलैंड, सिरालियोन के मंत्रियों और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं पर आधारित ग़ैर सरकार संगठन दा एल्डर्ज़ शामिल है जो मिलकर शांति, न्याय और मानवाधिकार के लिए काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 25 करोड़ 30 लाख से अधिक लोग अन्याय की बेहद ख़राब स्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, वह आधुनिक ग़ुलाम हैं, सरकार के बिना हैं, या उनके देश, समाजिक विवाद, हिंसा और जंगलराज का शिकार हैं।
इस में कहा गय है कि 4 अरब 50 करोड़ लोग क़ानून की ओर से दिए गये अवसरों में शामिल नहीं हैं, उनके पास क़ानूनी पहचान, उनकी नौकरी से संबंधित, ख़ानदान या जाएदाद से संबंधित दस्तावेज़ मौजूद नहीं और इसीलिए वह आर्थिक अवसरों, पब्लिक सेवाएं और क़ानून की रक्षा तक पहुंच प्राप्त करने में विफल हैं।

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