चुनावों के ठीक पहले लगा भाजपा नीत NDA को बड़ा झटका, योगी सरकार के केंदीय मंत्री ओमप्रकाश राजभर की पार्टी लड़ेगी अकेले सभी सीटो पर चुनाव

आदिल अहमद/ए जावेद

डेस्क। उत्तर प्रदेश से 74 लोकसभा सीट जीतने के भाजपा के सपने को लगातार धक्के लग रहे है। सभाओ में नदारद भीड़ जहा भाजपा के आलाकमान के पेशानी पर परेशानी का सबब बन रही है। वही बागियों के तेवर और विरोध के स्वर को शांत करवाने में भी भाजपा को मेहनत करना पड़ रहा है। इसी बीच आज भाजपा नीत एनडीए को एक बड़ा झटका लगा है जब योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री जो पहले से ही सरकार की मुखालफत करते रहते है ने आज खुद को एनडीए से अलग करके अकेले बल पर उत्तर प्रदेश की 25 सीटो पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

आज सोमवार को राजभर ने ऐलान किया कि उनकी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भाजपा से कोई संबंध नहीं रखेगी और उनकी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। उत्तर प्रदेश की 80 में से 25 सीटों पर राजभर अपने उम्मीदवार उतारेंगे। सभी 25 उम्मीदवारों का ऐलान आज सोमवार को ही किया जाएगा। बताया जा रहा है कि छठे-सातवें चरण वाली सीटों पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी चुनाव लड़ेगी।

गौरतलब हो कि इसके पहले भी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के महासचिव और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने बयान जारी करके यह ऐलान किया था कि उनकी पार्टी अकेले बल पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में ‘हम अकेले लड़ेंगे चुनाव’। उन्होंने जानकारी दी कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ महामंथन जारी है। आगे की रणनीति पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी लोकसभा वार कार्यकर्ताओं से समीक्षा करने में जुटी है तथा प्रदेश के 53 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि इसका खुलासा शीघ्र कर दिया जायेगा। उन्होंने बताया था कि दल में हर पहलुओं पर समीक्षा चल रही है और प्रत्याशी की सूची को अंतिम रूप देने के बाद इसे जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।

अरुण राजभर ने भाजपा हमला करते हुए कहा था कि कि भाजपा घमंड में चूर है तथा उसे गलतफहमी है कि केंद्र में फिर उसकी सरकार बनने जा रही है। भाजपा को लोकसभा चुनाव के बाद अपनी गलती का एहसास होगा। उन्होंने दावा किया था कि सुभासपा का जनाधार और लोकप्रियता निषाद पार्टी की तुलना में कहीं ज्यादा है। यह पिछले चुनाव में दोनों दलों को मिले मतों की संख्या से भी जाहिर होता है।

यहाँ गौरतलब बात ये है कि अगर सुभासपा के कार्यो पर और उसकी पहुच पर गौर करे तो 2017 विधान सभा चुनावों के पहले ये पार्टी राजभर समाज में अपनी पकड़ रखती थी और उसकी ये पकड़ पूर्वांचल तक सीमित थी। चुनावों के पहले ओमप्रकाश राजभर ने तत्कालीन कौमी एकता दल से गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इसके बाद समीकरण बदले और राजभर ने भाजपा का दामन थाम कर विधानसभा चुनावों में अपनी जीत का परचम फहराया वही दूसरी तरफ कौमी एकता दल ने बसपा में विलय कर लिया।

इसके बाद राजभर के मंत्री बनने के बाद से उनकी पकड़ प्रदेश के अन्य जिलो में भी होती गई और आज वह प्रदेश में राजभर समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे है। इसके लिए ओमप्रकाश राजभर की मेहनत को भी कम करके नही आका जा सकता है। बलिया के एक छोटे से गाव में राजनीती की शुरुआत करने वाले ओमप्रकाश राजभर कई सालो तक छोटी छोटी सभाये करके और राजभर समाज से मिलकर खुद की पार्टी और समाज में अपनी पकड़ को मजबूत किया। आज सुभासपा के पास विधानसभा में कुल 4 सदस्य राजभर समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे है। बताते चले कि कुल 8 विधान सभा सीट पर चुनाव लड़ने वाली सुभासपा को 4 सीट पर सफलता मिली थी।

इनपुट – साभार खबर एनडीटीवी

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