यमन युद्ध में अमरीका हथियार बेच रहा है, यमनियों का साहस सामने आया है लेकिन सऊदी अरब को विफलता और बदनामी के अलावा कुछ नहीं मिला है

आफताब फारुकी

यमन की लड़ाई बड़े विचित्र मोड़ पर पहुंच गई है। इसमें कई पक्ष व्यस्त हैं। सऊदी अरब के नेतृत्व में एक सैनिक एलायंस बना है जो यमन पर लगातार हमले कर रहा है। मार्च 2015 से जारी हमलों में पूरे देश का इंफ़्रास्ट्रक्चर तबाह हो गया है। 10 हज़ार से अधिक लोग मारे गए। लाखों लोग घायल हुए हैं। यमन मानवीय त्रासदी की कगार पर पहुंच गया है।

मगर इतनी लंबी लड़ाई के बाद सऊदी एलायंस को यमन में सामरिक और राजनैतिक स्वार्थ पूरे करने का मौक़ा नहीं मिल पाया है क्योंकि यमन में सेना और स्वयंसेवी बलों की ओर से ज़ोरदार प्रतिरोध हो रहा है। इस प्रतिरोध का नतीजा यह है कि किसी भी मोर्चे पर सऊदी एलायंस के सैनिक आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

यमन युद्ध में अमरीका और इस्राईल भी सऊदी अरब की मदद कर रहे हैं। यमन युद्ध में सऊदी अरब की मदद करने के पीछे अमरीका एक लक्ष्य हथियार बेचना है। इस युद्ध से अमरीका को भारी आर्थिक लाभ पहुंच रहा है और अमरीका के भीतर मीडिया और कांग्रेस सहित अनेक गलियारों की ओर से गहरी आपत्ति के बावजूद अमरीकी सरकार सऊदी अरब को हथियर बेच रही है।

ट्रम्प प्रशासन ने सऊदी अरब को हथियार बेचने का एक नया बहाना निकाल लिया है। अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने बयान दिया है कि अमरीका सऊदी अरब और इमारात को 8 अरब दस करोड़ डालर के हथियार बेच रहा है और यह हथियार ईरान के प्रभाव को रोकने के लिए उद्देश्य से बेचा जा रहा है। अमरीकी सेनेटर राबर्ट मनिन्डेज़ ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन कांग्रेस को नज़र अंदाज़ करके सऊदी अरब और इमारात को हथियार बेच रहा है और इसके लिए वह ईरान का नाम प्रयोग कर रहा है। कांग्रेस की ओर से यह आपत्ति जताई जा रही है कि ट्रम्प प्रशासन ईरान रणनीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कांग्रेस को अंधेरे में रखे हुए है।

यहां एक महत्वपूर्ण आयाम यह है कि सऊदी अरब को अमरीका तथा कुछ अन्य पश्चिमी देशों से हथियार तो ख़ूब मिल रहा है लेकिन यमन युद्ध को जीतने में यह हथियार उसकी मदद नहीं कर रहे हैं। यही नहीं यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों की ओर से जवाबी हमले तेज़ हो गए हैं। यमनी सेना ने हालिया दिनों में सऊदी अरब पर कई ड्रोन और मिसाइल हमले किए जबकि अबू धाबी एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की वीडियो भी जारी कर दी है।

यमन के ताक़तवर अंसारुल्लाह आंदोलन के एक नेता मुहम्मद बुख़ैती का कहना है कि हम रियाज़ और अबू धाबी के इंटरनैशनल एयरपोर्ट बंद करवा देने की क्षमता रखते हैं। 27 जुलाई 2018 को अबू धाबी के इंटरनैशनल एयरपोर्ट के भीतर ड्रोन हमले की वीडियो की ओर संकेत करते हुए मुहम्मद बुख़ैती ने कहा कि यह वीडियो साबित करती है कि इमारात के पास सच बोलने की हिम्मत नहीं है। इमारात ने हमले के समय कहा था कि कोई हमला नहीं हुआ है।

इस तरह अगर देखा जाए तो सऊदी अरब और इमारात का एलायंस यमन में केवल आम नागरिकों को नुक़सान पहुंचाता रहा है यमन की प्रतरोधक शक्ति में इस गठजोड़ के हमलों से कोई कमी नहीं आई है बल्कि उनकी प्रतिरोधक ताक़त लगातार बढ़ती जा रही है।

इस लड़ाई में यमन की सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन ने क्षेत्रीय जनमत के स्तर पर अपनी बहुत अच्छी छवि बनाई है। सऊदी अरब अंधाधुंध हमले कर रहा है जिसमें आम नागरिक निशाना बना रहे हैं। इस बात पर सऊदी अरब की आलोचना उन देशों में भी हो रही है जो सऊदी अरब के घटक समझे जाते हैं मगर इसके जवाब में यमनी सेना  और अंसारुल्लाह आंदोलन ने हमेशा इस बात का खयाल रखा कि उनके हमलों में कोई आम नागरिक निशाना न बनने पाए।

इस तरह इस लड़ाई में अगर कोई हार है तो वह सऊदी अरब है जिसने पूरी दुनिया में अपनी छवि ख़राब की है। उसे भारी आर्थिक नुक़सान हुआ है और बदनामी के अलावा कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। जहां तक अमरीका का सवाल है तो वहां की वर्तमान सरकार की नज़रें केवल आर्थिक हितों पर केन्द्रित हैं और वह उसे हथियार बेचकर हासिल हो रहे हैं और अगर आलोचना और बदनामी हो रही है तो ट्रम्प सरकार को इसकी कोई ख़ास चिंता नहीं है।

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