गंगा जमुनी तहजीब की जामा मस्जिद, रमजान में बढ़ी नमाजियों की संख्या

मसरूर खान

सिंगाही खीरी। रमजान इस्लामी साल का नौवां महीना है। इस महीने की शान दूसरे महीनों सेे निराली हैैै, क्योंकि इस महीने में कुरआन पाक नाजिल हुआ। सवाब हासिल करने के लिए रमजान शरीफ साजगार माहौल पैदा करता हैै। इस माह में मुसलमानों को रोजे रखने का हुक्म है। रमजान का माह आते ही मस्जिद में नमाजियों की संख्या में इजाफा हो गया है। बड़े बुजुर्ग दिन में मस्जिद में रह कर तिलावते कुरान और दीगर इबादतें करते हैं। रमजान के महीने मेें मस्जिद की रौनक रोजेदारों के सजदों से गुलजार हो गई है।

गंगा जमुनी तहजीब की जामा मस्जिद

सिंगाही की ढ़ाई सौ साल से भी ज्यादा पुरानी जामा मस्जिद शहर की गंगा जमुनी तहजीब की अलमबरदार है। यह यहां सबसे पुरानी मस्जिद होने का रुतबा रखती है। जामा मस्जिद को यहां इसलिए भी अहमियत हासिल है कि प्रसिद्ध रूहानी पेशवा इमाम हजरत मौलाना अबदुल अहद साहब ने भी इस में इमामत कर फरमा चुके हैं।

मस्जिद के एक ओर मुसलिमों की आबादी, तो दूसरी ओर गैर मुस्लिम भी इसे अकीदत की निगाह से देखते हैं। शहर की यह कदीम मस्जिद यहां की गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है। लगभग ढाई़ सौ साल पहले मस्जिद का निर्माण हुआ था। इससे पहले अंजुमन का गठन हुआ। अंजमन इस्लामिया का गठन सन् 1894 में हुआ था। मस्जिद के बारे बुजुर्गों ने बताया कि यहां जब इस मस्जिद की तामीर का काम शुरू हुअ,ा तो शहर में दूसरी मस्जिद नहीं थी। मस्जिद से लगा इसका अहाता लोगों के लिए शादी विवाह में कार्य आता है।

मस्जिद की संपत्ति में लगभग दो दर्जन दुकानें हैं, जिनका किराया आदि मस्जिद के खर्चे पूरे करता है।

शहर की इस पुरानी मस्जिद में एक जमाने में इमाम हजरत मौलाना अबदुल अहद साहब इमामत करते थे। आज भी यह हिंदू-मुसलिमों में साझा अकीदत का केंद्र बनी हुई है। शाम की मगरिब नमाज के बाद मुसलिमों के साथ गैर मुसलिम महिलाएं भी बच्चों को नमाजियों से फूंक डलवाने कतारों में खड़ी होकर गंगा-जमुनी तहजीब का जीता जागता नजारा पेश करती हैं। जिम्मेदार कहते हैं कि मस्जिद के पास तामीरी काम जारी है। इसके मुकम्मल होने पर मस्जिद के अंदर और जगह हो जाएगी। इस कार्य के लिए मुसलमान दिल खोल कर मदद कर रहे हैं। नगर के सहयोग से इस इबादत घर की मीनार जिसकी उंचाई लगभग 60 फिट है।जो तवज्जोह का मर्कज बनी हुई है।

107 साल के बुजुर्ग मुतवल्ली हकीम महमूद खां जो पिछले 1973 वर्षों से मस्जिद की सारी जिम्मे दारी को बाखूबी निभा रहे है। इस मस्जिद में गंगा जमुनी तहजीब की नींव रखने वाले महमूद खां ही है। वह दिन रात इसे आगे बढाने के लिये दिन रात मेहनत करते रहते है

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