वीडियो हुआ वायरल – इटावा जेल के अन्दर होता जुआ, और जुआरी दे रहे पुलिस वाले को पैसा

आदिल अहमद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जेल अपराधियों की आरामगाह बनता जा रहा है। देवरिया जेल में बंद कुख्यात बाहुबली अतीक अहमद ने लखनऊ से युवक को अगवा करवा कर जेल में उसकी पिटाई किया था। मामला जोर पकड़ा तो प्रशासन थोडा सख्त हुआ। फिर उसके बाद उन्नाव जेल में एक कैदी द्वारा फिल्मो की एक्टिंग करता हुआ वीडियो वायरल हुआ था। इस दौरान कुछ और जेल के भी वीडियो वायरल हुवे थे। उन्नाव जेल के वीडियो में तो कैदी एक हाथ में तमंचा लेकर फिल्मो की एक्टिंग कर रहा था। गृह विभाग ने मामले में रिपोर्ट दिया था कि वह तमंचा मिटटी का बना हुआ था। इसके बाद मामला शांत हो गया।

लगातार जेल में पड़ रहे छापो में आपत्तिजनक चीज़े बरामद होती है। स्थानीय प्रशासन इसके लिए कैदियों पर कार्यवाही भी करता है और कैदियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज होता है। मगर जेल प्रशासन इस बात पर अपना पक्ष कभी रखता नही दिखाई देता है कि जेल के अन्दर आपत्तिजनक चीज़े और मोबाइल पहुचे कैसे।

अभी दो दिनों पहले ही मऊ जेल का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे जेल के अन्दर मोबाइल फोन, हीटर तक इस्तेमाल करता दिखाया गया था। यहाँ तक कि एक युवक द्वारा किसी छोटी पुडिया में कुछ पाउडर पैक किया जा रहा था। जिसके हिरोईन होने का दावा किया जा रहा था। वीडियो के वायरल होते ही एसपी मऊ अनुराग आर्या ने मामले में जाँच एलआईयु से करवाने का आदेश दिया था। यह प्रकरण अभी जाँच के दायरे में ही था कि आज एक और सूबे की जेल का वीडियो वायरल हुआ है।

आज इटावा जेल का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कैदी झुंड बना कर जुआ खेलते और उसके एवज में पुलिस को घूस देते दिख रहे हैं। वीडियो में कैदियों का झुंड जुआ खेलता नजर आता है, जुए में लगी रकम के जीतने-हारने की आवाजें आ रही हैं और ये जुआरी पुलिस को पैसा देते भी दिखते हैं। लेकिन जेल अधीक्षक कहते हैं कि ये उन्‍हें बदनाम करने की साजिश है।

इटावा जेल के अधीक्षक राज किशोर सिंह ने कहा है कि वो किसी साजिश का भी अंग हो सकता है कि साजिश कर के इस जेल के नाम पर कोई पुराना वीडियो चला कर जेल प्रशासन को बदनाम करना चाहता है, बैकफुट पर करना चाहता है।

ये बयान एकदम ऐसा ही था जैसा मऊ जेल अधीक्षक का बयान था। मऊ जेल में गांजे के कारोबार का भी वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो बनाने वाले का आरोप था कि जेल प्रशासन वहां गांजा बिकवाता है। मऊ जेल की सात नंबर बैरक की लोकेशन को साबित करने के लिए उसने कैमरा पैन कर के आसपास की तस्‍वीर भी दिखाई थी। लेकिन मऊ जेल के अधीक्षक ने दावा किया कि किसी ने जेल का सेट बनकर वहां गांजे की पुड़िया बनाने का वीडियो शूट किया है ताकि उन्‍हें बदनाम किया जा सके। उन्‍होंने अपने बयान में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कारागार में निरुद्ध अपराधियों ने कारागार के बाहर अपने गुर्गों से कोई वीडियो बनवाया हो जो कि कारागार के बैरक जैसा प्रतीत होता हो।

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