साहेब, मानको के विपरीत बन रहा सी०एच०सी० अस्पताल यह अधिकारियों की मिलीभगत है या लापरवाही ?

आदिल अहमद

कानपुर। नर्वल क्षेत्र में मानको के विपरीत सी०एच०सी० अस्पताल बन रहा जिसके विरोध मे आज दिनांक 6 जुलाई को हिन्दू समन्वय समिति ने मजिस्ट्रेट द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। इस मौके पर मीडिया से बात करते हुवे हिन्दू समन्वय समिति के महानगर अध्यक्ष कुँ० ब्रजराज सिंह ने बताया कि नर्वल के टोस क्षेत्र में सीएचसी अस्पताल बनाया जा रहा है जिसके निर्माण हेतु कनिष्ठ अभियंता महेश चन्द्र मिश्रा रामवचन और ठेकेदार योगेन्द्र सिंह सेंगर के नेतृत्व में अंशु कंस्ट्रक्शन को अस्पताल निर्माण का काम दिया गया। परन्तु बिना नक़्शे के ठेकेदार और कनिष्ठ अभियंता ने काम शुरू कराया है। निर्माण में बालू और डस्ट का अत्याधिक प्रयोग किया गया, जिसका नरेन्द्र मिश्रा ने विरोध किया तो उसको कार्य से विमुक्त कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह बनी बिल्डिंग मानको के विपरीत और आधारभूत रूप से अत्यंत ख़तरनाक और कुछ वर्षों में क्षतिग्रस्त होने लायक है। उन्होंने भवन की खामिया गिनाते हुवे बताया कि इस भवन मानक के अनुरूप आधार नींव का निर्माण जो 1।5 मीटर की जगह 1।5 फीट रखी गई है। से खुदाई और मैटिरियल का पैसा बचाया गया है। मानक विपरीत ईंटों की चुनाई डस्ट और बालू के द्वारा किया गया है।  निर्माण में मानक विपरीत अव्वल ईंट के स्थान पर पीली पेटी ईंट का प्रयोग हुआ है जिसकी जुदाई 8-1 मसालों से हुई है। नाख्शे के अनुरूप खंभो और बीम में उचित 12mm के स्थान पर 8mm सरियों का उपयोग किया गया है। छत की ढलाई मानक के विपरीत 5 इंच की मोटाई होना चाहिये जो कि नहीं है।

उन्होंने कहा कि इन कारणों से यह भवन अत्यंत कमजोर है और लोंगो की जान माल के लिए खतरनाक है। इस भवन की जांच नरेन्द्र कुमार के प्राथना पत्र पर स्वंय अपर प्रमुख सचिव ने 16 अक्टूबर 2018 में करने के पश्चात सी डी ओ अक्षय त्रिपाठी को सम्पूर्ण जांच हेतु कहा था। उसके बाद से जिलाधिकारी को भी कई प्राथना पत्र दिया जा चुका है, लेकिन आज तक न ही सीडीओ अक्षय त्रिपाठी द्वारा और ना जिलाधिकारी द्वारा कोई भी कार्यवाही हुई।

हिन्दू समन्वय समिति के महानगर अध्यक्ष कुँ० ब्रजराज के बयानों को आधार माने तो इससे दो बात खुलकर सामने आ रही है कहीं न कहीं संबंधित अधिकारियों की ठेकेदार से सांठ गांठ है या फिर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाह है। अब देखना यह है कि इस पर जिलाधिकारी क्या कार्यवाही करते है।

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