चाँद फरीदी की कलम से – नशे के आग़ोश में समाने को बढ़ते ये नवजवान कदम

(चाँद फरीदी की विशेष रिपोर्ट)

युवा पीढ़ी पर नशीले पदार्थों की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। युवतियों में ड्रग्स स्टेटस सिंबल बन जाने से इस बुराई की समाप्ति की मुश्किल बढ़ती जा रही है। स्कूल, कालेज नशे से अछूते नहीं हैं। अफीम व अफीम से बने मारफिन, कोडीन, हेरोइन व ब्राउन शुगर, गांजा व गांजे से बने चरस व हशीश, कोकीन, सैन्कोटिक ड्रग्स जैसे एलएसडी, मैंड्रोक्स व पीसीपी, छोटे नगरों व गांवों में गांजे ने अपने पैर पसार रखे हैं, तो बड़े नगरों में हेरोइन व ब्राउन शुगर ने अपनी जड़ें जमा ली हैं।

भारत विश्व में सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह कहने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा कि भारत इस समय युवाओं के जोश से भरा हुआ है ,जो किसी देश की प्रगति के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है और इसी युवा शक्ति के बलबूते पर वर्ष 2025 तक भारत दुनिया की “आर्थिक महाशक्ति”बनना चाहता हैं, जिस युवा पीढ़ी के बल पर भारत विकास के पथ पर प्रगतिशील होने का दंभ भर रहा है ,उस युवा पीढ़ी में नशे की सेंध लग रही है और युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे है ,जो चिंता का विषय है। युवाओं में नशा अब इस कदर हावी हो गया है कि नशा अब मौजमस्ती का नहीं अपितु आज की युवा पीढ़ी के लिए आवश्यकता बनत जा रहा है। ‘चाइल्ड लाइन इंडिया फॉउन्डेशन’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में 65 प्रतिशत नशाखोरी से वे युवा ग्रस्त है ,जिनकी उम्र 18 वर्ष से भी कम है। युवा सिगरेट, शराब व गुटखा का सेवन तेज़ी से कर रहा है। एक सर्वे के अनुसार देश में प्रतिदिन लगभग 6000 युवा तम्बाकू उत्पादों के सेवन करने वालों में बढ़ोतरी कर रहा है। नशे के सेवन में महिलायें भी पीछे नहीं है ,भारत में लगभग 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते है ,जिनमे 25 प्रतिशत महिलाएं धूम्रपान करती है। सिगरेट पीने के मामले में भारत की लड़कियां अमेरिका के बाद पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ने185 देशों में सिगरेट पीने वालों पर रिसर्च करने के बाद बताया है कि महिला स्मोकर्स के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। जो भारत में 1 करोड़ 27 लाख तक आंकड़ा पार कर चुकी हैं। वही शराब का सेवन करने मे भारतीय युवाओं में तेजी के साथ आगे निकल रहे हैं। 40 देशों में शराब के सेवन संबंधी अध्ययन में सामने आया हैं, कि मात्र 20 वर्षों में ही भारत में शराब के उपयोग में 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वही महिलाओं में इस प्रवृत्ति का आना समस्या की गंभीरता दर्शाता है। महिलाओं में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति के संबंध में किए गए सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि क़रीब 45 प्रतिशत महिलाएँ इसकी गिरफ्त में हैं।

युवाओं में नशा सिर्फ सिगरेट व शराब सीमित नहीं रहा बल्कि वर्तमान समय में कोकीन ,हेरोइन ,गांजा ,चरस ,नशीली दवाइयाँ आदि का नशा युवाओं को तेजी अपनी गिरफ्त में ले रहा है।वही सरकारी आकड़ो की बात की जाए तो देश का कई लाख युवा हेरोइन जैसे नशे के आदी हो रहे है। भारतीय राष्ट्रीय सर्वे की रिपोर्ट की बात की जाए तो भारत की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा लगभग एक करोड़ से अधिक लोग नशीली दवाइयों का सेवन ही नहीं करते है बल्कि इसके पूर्णतया आदी हो चुके है।

भारत में नशे का कारोबार बहुत बड़ा है और यह दिन प्रतिदिन एक विकराल रूप धारण करता जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नशीली दवाओं की तस्करी में पिछले तीन वर्षों में पांच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। भारत में प्रतिवर्ष अरबो रूपये का नशे का कारोबार हो रहा है। एक गैर सरकारी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में कई करोड़ रुपये की ड्रग्स की खपत हर वर्ष हो रही है। जिनमें हेरोइन औऱ ड्रग्स पर तो चौकाने वाले आंकड़े सामने आये है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तत्बाकू के प्रयोग के कारण दुनिया भर में 50 लाख से अधिक लोग प्रति वर्ष अपनी जान गंवा रहे है, जिनमें से कई लाख मौते तो केवल भारत में हो रही है। वहीं शराब से प्रतिवर्ष लाखों लोगों की मौत हो रही है। नशा दीमक की तरह युवाओं की जवानी को बर्बाद कर रहा है। नशे के कारोबारी नशे के साथ ही साथ आतंकवाद को भी बढ़ावा दे रहे है। नशा कई तरह से अलग अलग देश को नुसकान पहुंचा रहा है।युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी से उनका भविष्य गर्त में जा रहा है। स्थिति इतनी विकट होती जा रही है, कि हर आयु वर्ग तक कोई अछूते नहीं रह पा रहे हैं। युवाओं में फैलता नशा रूपी यह जहर हमारे देश व प्रदेश की रगों-रगों में बैठता जा रहा है। जिन कन्धों पर देश का भविष्य निर्भर है उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया हैं, जो युवा वर्ग के भविष्य की संभावनाओं को मार रहा है।

इंडियन काउंसिल आफ़ मैडिकल रिसर्च’ के अनुसार लड़कियों के नशा करने के पीछे जो वज़ह मानी हैं – वह मित्रों का प्रभाव, बड़ों की नकल करना औऱ भूख को दबाने के लिए नशे का इस्तेमाल किया जा रहा है, नशा करने वाली लड़कियों की संख्या सर्वाधिक है।युवतियों में सिगरेट व शराब पीने की निरंतर बढ़ रही प्रवृत्ति तो हानिकारक है ही, नशीले पदार्थों का सेवन तो इस से भी ज्यादा घातक है। युवा पीढ़ी पर नशीले पदार्थों की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। युवतियां समाज की अमूल्य धरोहर हैं. जो घर परिवार व समाज को आदर्श रूप देने में अहम भूमिका निभाने वाली होती हैं इन का शिक्षित, प्रशिक्षित व आदर्शवान होना जरूरी है।नशे की गिरफ्त में लड़कियां पश्चिमी सभ्यता व आधुनिक विचार अपनाने वाले कितने ही परिवारों की लड़कियां स्कूल व कालेज से ही नशीले पदार्थों का सेवन करने लगती हैं। युवतियों में भी ड्रग्स स्टेटस सिंबल बन जाने से इस बुराई की समाप्ति और भी मुश्किल होती जा रही है. स्कूल कालेज भी नशे से अछूते नहीं हैं। नशाखोरी की वजह किसी न किसी समस्या से ग्रस्त होना है. आर्थिक दिक्कत, नौकरी की तलाश, असफल प्रेम, मनचाही सफलता न मिलना, परीक्षा में फेल हो जाना, सुखशांति न मिलना जैसे कितने ही कारण हैं, जिन से बचने के लिए उन्हें नशे का सेवन ही आसान व एकमात्र उपाय नजर आता हैं। नशे की लत का आलम यह हैं कि कुछ लोग नशा करने के लिए साइकिल बनाने वाले पंक्चर में लगने वाले सुलोशन औऱ व्हाइटनर तक का इस्तेमाल करते हैं। यह नशा उन लोगों में ज्यादा प्रचलित है, जिन्हें नशा तो करना है, मगर उनके पास पैसे नहीं होते हैं। रात का समय हो या फिर दिन का समय रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व अन्य चौराहों पर इस घातक नशे की गिरफ्त में युवा पूरी तरह जकड़ चुके हैं।

उत्तर प्रदेश के कुछ ज़िलो में स्मैक, गांजा, भांग, अफीम जैसे मादक पदार्थों की चपेट से पता पड़ा हुआ है, जिसकी लत से युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश हो या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थो के सप्लायरों की संख्या पूरे प्रदेश में फैलती हुई है, प्रभावित शहरी क्षेत्र औऱ ग्रामीण इलाको में स्मैक का बाज़ार गर्म ही रहता हैं। ऐसे में शासन वं प्रशासन की भी जिम्मेदारी बनती है कि युवाओं को नशे के चक्रव्यूह से बचाने के लिए प्रदेश एवं समाज विरोधी तत्वों की पहचान करें औऱ उनके विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करने की व्यवस्था को दृढ़ बनाने की प्रक्रिया को सख्त करें। संविधान के अनुच्छेद 47 के अनुसार, चिकित्सीय प्रयोग के अतिरिक्त स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पदार्थों व वस्तुओं के उपयोग को निषिद्ध करने केलिए 1985 में नशीली दवाएं व मनोविकारी पदार्थ कानून- एनडीपीएस एक्ट बनाया। इस कानून को लागू करने मादक पदार्थों का सेवन करने, इलाज, शिक्षा, बीमारी के बाद देखरेख वह समाज में पुनर्स्थापना के लिए जोरदार प्रयास किए जा रहे हैं।

नशा करने वालो की बढ़ती तदाद से विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चिंतित हो उठा। जिसके चलते सर्वप्रथम 31 मई 1987 केा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तम्बाकू निषेध दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा तक कर दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन का एकमात्र उद्देश्य यह रहा है कि मंच के माध्यम से, नुक्कड़ नाटकों के द्वारा यह जागरूकता रैली का आयेाजन करते हुए पूरे विश्व में इस अभियान का मशाल प्रज्ज्वलित की जाये और आम से खास लोगों को यह बताया जाये कि वे अपने देश के लिए कितने अनमोल हैं। जीवन का उद्देश्य सामाजिक कर्तव्यों की पूर्ति के साथ देशभक्ति होना चाहिए, न कि तम्बाकू और धु्रमपान जैसी लत को पालकर मौन आत्महत्या की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। प्रतिवर्ष धुम्रपान से होने वाली बीमारियों लाखों लोग समय से पूर्व मौत का निवाला बन रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए लोकल प्रशासन को भी सख्त कार्यवाही करनी होगी। आज के समय में तम्बाकू युक्त गुटखे का सेवन सामान्य बात हो चली है। धूम्रपान और तम्बाकू का नशा व सामाजिक बुराई है, जिसे केवल कानून और दंड के बल पर दूर नहीं किया जा सकता।

जिंदगी तबाह करने वाली इस बुराई से मुक्ति के लिए सामाजिक चेतना, जागृति और सभी वर्गों को एकजुट होकर मजबूती के साथ प्रयास करने की जरूरत है। यदि हम इससे होने वाले नुकसान के आंकड़ों पर जाये तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे के अनुसार लगभग 65 लाख लोग प्रति वर्ष इस नशे के चक्कर मे अपनी जान गवा रहे हैं। मौतों का यह मंजर गरीब तथा औसत आय कमाने वाले देशों में कमाने वाले देशों में अधिक देखा जा रहा है, यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन को यदि वैश्विक स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया तो सन 2030 तक स्थिति इतनी भयानक हो सकती हैं कि प्रति वर्ष मौत के मुंह में समाने वालों की संख्या 80 लाख से ऊपर तक पहुंच सकती है। अतः ऐसी चेतावनी को गंभीरता से लेना होगा। हमारा देश अभी भी गांवों का देश है, जहां लगभग दो तिहाई आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।विकसिक देशों में धूम्रपान की लत महिलाओं और युवतियों पर तीव्रता के साथ बढ़ रही हैं।

(लेखक लखनऊ जनपद के एक जाने माने पत्रकार है और नगर की बात समाचार पत्र के प्रधान सम्पादक है)

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