गोवा के निवर्तमान उपमुख्यमंत्री का बड़ा एलान, लेंगे सरकार से समर्थन वापस, जाने क्या है कारण ?

सायरा शेख/ रिजवान अंसारी

पणजी: गोवा में कांग्रेस को ही झटका केवल नही लगा है बल्कि कांग्रेस के विधायको के भाजपा में आने से भाजपा में अंदरूनी नाराजगी और कार्यकर्ताओ में भी खीचातानी बढ़ गई है। पहले तो दबे जुबांन इस घटना का पार्टी के अन्दर विरोध हो रहा था मगर अब यह विरोध के स्वर दबी ज़बान में न होकर अल्फाजो से अया हुवे है। गोवा के निवर्तमान उप मुख्यमंत्री विजय सरदेसाई ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस के 10 विधायकों को भाजपा में शामिल करना दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा स्थापित परंपरा को खत्म करना है।

गौरतलब है कि शनिवार को गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले माइकल लोबो और इस सप्ताह भाजपा में शामिल होने वाले 10 में से तीन विधायक चंद्रकांत कावलेकर, जेनिफर मोन्सेराते, फिलिप रोड्रिगेज ने नए मंत्रियों के तौर पर शपथ ली। गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा ने दोपहर में राज भवन में आयोजित एक समारोह में नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

बताते चले कि इस तटीय राज्य के सबसे कद्दावर भाजपा नेता रहे पर्रिकर को क्षेत्रीय दलों को एकजुट कर 2017 में सरकार बनाने का श्रेय जाता है। गोवा में कांग्रेस को बुधवार को उस वक्त जोरदार झटका लगा, जब उसके 15 में से 10 विधायकों ने अपना पाला बदल लिया और भाजपा में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम से 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 27 हो गई है। इसके बाद, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने चार मंत्रियों को अपनी कैबिनेट से हटा दिया, जिनमें सरदेसाई सहित गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) के तीन मंत्री और एक निर्दलीय शामिल हैं।

सरदेसाई ने मिरामार में पर्रिकर के स्मारक के पास लोगों से कहा कि पर्रिकर की दो बार मौत हुई है। उनका देहावसान 17 मार्च को हुआ था, जबकि आज उनकी राजनीतिक परंपरा खत्म हो गई। उन्होंने यह घोषणा भी कि गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) भाजपा नीत सरकार से अपना समर्थन वापस ले रही है। सरदेसाई ने कहा कि हमने प्रमोद सांवत सरकार का समर्थन किया था क्योंकि मैंने पर्रिकर से वादा किया था कि किसी भी परिस्थिति में सरकार को समर्थन जारी रहेगा। हम अब राजग द्वारा ठगे गए महसूस कर रहे हैं।

सरदेसाई ने दोहराया कि भाजपा के किसी केंद्रीय नेता ने उनसे बात नहीं की है। उन्होंने कहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी साख खो दी है। राजग ने अपने सहयोगियों को छोड़ दिया।

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