स्तनपान सर्वोत्तम आहार, शिशु का मौलिक अधिकार. स्तनपान से माँ को स्तन कैंसर का खतरा भी होता है कम

संजय ठाकुर

मऊ – जनपद में “विश्व स्तनपान सप्ताह” मनाया जा रहा है जो सात अगस्त तक चलेगा, जिसका उद्देश समाज में यह संदेश देना है कि नवजात के लिए स्तनपान सर्वोत्तम आहार तथा शिशु का मौलिक अधिकार है। मां का दूध नवजात शिशु के लिए व्यापक मानसिक विकास व् नवजात को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने और उसके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इस सप्ताह समुदाय स्तरीय गतिविधियों के तहत जनपद के सभी ब्लाकों के अंतर्गत ग्राम सभाओं में आंगनबाड़ी और आशाओं के साथ गोष्ठी कर आमजन में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीशचन्द्र सिंह ने बताया बच्चों के सर्वांगीण एवं शारीरिक विकास हेतु स्तनपान अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसका शिशु एवं बाल जीवितता पर प्रभाव पड़ता है।  शिशुओं को 1 घंटे के अंदर स्तनपान नहीं कराया जाता है उनमें नवजात मृत्यु दर की संभावना 33% अधिक होती है। 6 माह की आयु तक के शिशु को केवल स्तनपान कराने पर बाल्यकाल रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरों में 11%  से 15% की कमी लाई जा सकती है।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ ए. के. गुप्ता ने बताया प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान को समर्थन देने के साथ ही स्तनपान संबंधी अधिकार के प्रति जागरूकता प्रदान करना है। उन्होने बताया नवजात शिशु के लिए पहले ही घंटे के अंदर पीला गाढ़ा जो कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है, आवश्यक रूप से पिलाना चाहिए। नवजात शिशु को छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए और इसके बाद दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ अनुपूरक पूरक आहार भी देना चाहिए।

उन्होने बताया स्तनपान एक नैसर्गिक प्रक्रिया है जिससे माँ और बच्चे के बीच में आपसी लगाव बेहद मजबूत होता है। वहीं बार-बार स्तनपान कराने से लगातार दूध भी बनता रहता है। इसके साथ ही माँ को स्तन कैंसर का खतरा भी कम रहता है। जिला महिला अस्पताल की बाल रोग विशेज्ञ डॉ कंचन लता ने बताया स्तनपान बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। शिशु को सम्पूर्ण आहार मिलता है। माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक लगाव और मजबूत करता है।

क्या कहते हैं आंकड़े –

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 25.2 फीसदी है जो काफी काम है। छह माह तक केवल स्तनपान की दर 48.8 फीसद है जो कि अन्य प्रदेशों की तुलना में काफी कम है। जनपद मऊ की बात करें तो यहाँ एक घंटे के अन्दर स्तनपान की दर अभी मात्र 22.9 प्रतिशत है जबकि छह माह तक स्तनपान की दर 22.5 फीसद है।

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