विधायक बेटे संग ईद-उल-अजहा की पढ़ी आज़म खान ने नमाज़, नमाज़ के बाद बोले आज़म खान – वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता

हरमेश भाटिया

रामपुर। सपा के कद्दावर नेता और रामपुर से मौजूदा सांसद आजम खान 1 महीने के बाद रामपुर पहुंचे और ईद उल अजहा के मौके पर ईदगाह में अपने समर्थकों के साथ नमाज अदा किया। नमाज के बाद उन्होंने रामपुर की जनता से ईद मिली और सब लोगों को बधाई दिया। इस दौरान रामपुर की जनता में अपने नेता आजम खान से ईद मिलने को लेकर काफी खुशी का माहौल था और काफी वक्त लगा आज़म खान को गले मिलते मिलते। आज इस मौके पर आज़म खान ने अपने जनबल का मुजाहिरा किया और दिखाया कि आज भी उनके चाहने वालो की कमी रामपुर में नही है। ईदगाह के बाहर ही नमाज़ के बाद हज़ारो के हुजूम से उन्होंने गले मिलकर उनको ईद की बधाई दिया। इस दौरान लोग अपने सांसद से गले मिलने के लिया लम्बी कतार तक में लग गये।

आज़म खान के बयान के लिए खड़े मिडिया कर्मियों को उनके फ्री होने का लम्बा इंतज़ार करना पड़ा। ईद मिलने के बाद आजम खान ने मीडिया से भी बात किया। आजम खान ने कहा ईद अच्छे से मन जाए यही बहुत है। डर ये  रहता है पता नहीं कब क्या हो जाए। आजम खान ने कहा कुर्बानी का मौका है, जितनी जिसकी कुर्बानी हो जाए अच्छा है। यह ईद कुर्बानी की कहलाती है। कुर्बानी मांगती है यह ईद। आजम खान पर लगे मुकदमों के सवाल पर आजम खान ने कहा इसमें क्या कहना है, क्या नजर नहीं आता ? कितना बड़ा जुल्म है हमारे ऊपर कोई मुकदमा नहीं है, सारे मुकदमे ही यूनिवर्सिटी पर हैं। सारे मुकदमे हैं बच्चों के स्कूलों पर। आपके हाथों में झाड़ू देना है, आप से संडास साफ करवाना है। आपसे सड़कों पर झाड़ू दिलाना है, आप को गुलाम बनाना है। आपके हाथों में कलम कौन आने देगा और गैरों की शिकायत क्यों करते हो, अपनों से सवाल करो, खुद अपने गिरेबान में मुंह डालकर देखें।

उन्होंने कहा कि सिवाय हैरत करने की और कुछ नहीं कहा जा सकता। यह सिर्फ लोकसभा का इलेक्शन जीतने के लिए किया गया। अब क्योंकि विधानसभा का बाय इलेक्शन सामने है, यह जुल्म करके यूनिवर्सिटी बर्बाद करके इलेक्शन जीत लेंगे। क्या भारतीय जनता पार्टी और जिले का इंतजामिया इलेक्शन जिता पाएगा, मुझे हरा पाए ? मुझे हरा सके इलेक्शन ऐसे जीतेंगे विधानसभा का, जुल्म करके ?

बेशक आज़म खान ने नाम तो नहीं लिया मगर उनके अलफ़ाज़ खुद के अन्दर झाकने का कही न कही रामपुर में उनके विरोधी बनकर उभरे कुछ स्थानीय स्तर के नेता पर ही था। इस दौरान आज़म खान के चेहरे पर कोई शिकन नही महसूस हुई और उनका पुराना अंदाज़-ए-बयान वही रहा।

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