मासूम का शव कंधे पर लेकर डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिये भटकता रहा एक गरीब बाप, नही पिघला स्वास्थ विभाग का पत्थर दिल

फारूख हुसैन

लखीमपुर खीरी के जिला अस्पताल में संवेदनहीनता फिर एक बार देखने को मिली, जब एक गरीब पिता अपने मासूम बच्चे का शव कंधे पर लेकर अस्पताल में घंटो भटकता रहा, लेकिन अस्पताल के लोगों ने मृत्यु प्रमाण पत्र देने में काफी देरी की। इस दौरान कई बड़े आरोप भी पीड़ित पिता के द्वारा अस्पताल प्रशासन पर लगा। मामले में वीडियो और फोटो वायरल होने के बाद सीएमओ साहब ने मामले को बराबर करने की बात करते हुवे बताया की मात्र दस मिनट में ही डेथ सर्टिफिकेट दे दिया गया था। हमारे पास रिकॉर्ड है।

प्रकरण के सम्बन्ध में प्राप्त समाचारों के अनुसार थाना क्षेत्र नीमगांव के ग्राम रमवापुर निवासी दिनेश चंद्र के 4 वर्ष के पुत्र दिवांशु को जिला अस्पताल में बुखार के चलते भर्ती कराया गया था, जहा बुधवार को उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत की सूचना पर पिता बेहाल हो गया। अस्पताल में उसे बताया गया कि बच्चे का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना होगा। दिनेश ने बताया कि इस पर वह परेशान हो गया। बेटे के गम में उससे पहले ही तोड़ दिया था और अब अस्पताल के इस फरमान के कारण उसे कुछ सूझ नहीं रहा था। वह बच्चे के शव को कंधे पर लेकर अस्पताल में भटकता रहा, लेकिन उसकी किसी ने मदद नहीं की।

यही नहीं जिला अस्पताल में धरती पर विचरण कर रहे इन भगवानों की इंसानियत ने शायद दिव्यांश के साथ ही दम तोड़ दिया होगा, तभी तो दिनेश की आंखों में आसु और उसके कंधे पर बेटे लाश उनकी आँखों पर बंधी कर्त्तव्यविमूढ़ता और विलासिता की पट्टी के कारण नहीं दिखाई दी और एक मजबूर गरीब बाप अपने कंधे पर अपने मासूम बच्चे का शव उठाये एक काउंटर से दुसरे काउंटर पर जाता रहा और सभी “नेक्स्ट” का गुटरगु उसको सुना दे रहे थे। जबकि जिला अस्पताल में मौजूद तीमारदार और मरीज यह देख कर सन्न थे किसी को यह नहीं समझ में आ रहा था कि आखिर इस बाप का कसूर क्या है।

वैसे भी उनके समझ में नहीं आने वाला कि उस गरीब बाप का कसूर क्या है। हकीकत में उस गरीब बाप का कसूर सिर्फ और सिर्फ उसकी गरीबी है जिससे वह काफी कमज़ोर है। यही उसकी जगह कोई धनबली अथवा बाहुबली होता तो शायद इसी अस्पताल का प्रशासन उसके कंधे पर सर रखकर बच्चे के मौत का विलाप करता और कहता आप सर जाइए मैं खुद लेकर डेथ सर्टिफिकेट आ जाऊंगा। शायद अंतिम संस्कार में भी जाकर खुद का नाम रजिस्टर में लिखवा कर उस धनबली और बाहुबली के नजरो में अपना कद ऊँचा कर रहे होते।

मगर ये गरीब दिनेश चन्द्र था। उसकी गरीबी उसकी सबसे बड़ी कमजोरी थी, तभी तो वह अपने कलेजे के टुकड़े का शव अपने कलेजे से लगा कर इस दर से उस दर भटकता रहा कि साहब कोई तो डेथ सर्टिफिकेट बनवा दो। मगर कोई सुनने वाला नही था।

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