दुस्साहसिक ड्रैगन – चीन सीमा पर झड़प में सेना के एक अधिकारी और दो जवान हुवे शहीद, चीन का भारी नुक्सान, जाने क्या बोला ड्रैगन

आदिल अहमद

नई दिल्ली. लद्दाख पर अपनी गन्दी नज़र गडाए ड्रैगन ने कल देर रात अपने इरादे दुस्साहसिक कर डाले और भारतीय सैनिको पर गोलीबारी उस दौरान किया गया जब दोनों सेना पीछे हट रही थी। चीन के इस दुस्साहसिक घटना के बाद देश में चीन के लिए नफरतो का पैमाना और भी बढ़ चूका है। चीन द्वारा हुई गोलीबारी में सेना के एक अफसर और दो जवान शहीद हो गए है।

NDTV में प्रकाशित खबर के लद्दाख इलाके में यह 1962 के बाद ऐसा पहला मौका है जब सैनिक शहीद हुए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों सेनाओं की ओर से रात में पीछे हटने की प्रक्रिया जारी थी लेकिन अब अचानक चीनी सैनिकों की ओर से हरकत की गई है जिसमें भारतीय सैनिक शहीद हो गए हैं। खबर मिल रही है कि कल रात हुई इस झड़प में भारतीय सेना की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई में चीन को काफी नुकसान हुआ है। लेकिन अभी इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नही हुई हैं।

BBC हिंदी द्वारा प्रकाशित समाचार में कहा गया है कि चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत अगर एकतरफा कदम उठाएगा तो इस तरह की दिक्कतें सामने आएंगी। चीन का आरोप है कि भारतीय सैनिक उसकी सेना में घुस आए थे। चीन की ओर से की गई इस हरकत के बाद अब विश्वास बहाली बड़ा मुद्दा हो गया है। वहीं दोनों सेनाओं की ओर से इस सीमा पर तोपें और अन्य साजो-सामान भी इकट्ठा होने के साथ साथ सैनिकों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

NDTV ने अपनी खबर में कहा है कि उसको मिल रही जानकारी अनुसार इस घटना के बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक जारी है। गौरतलब हो कि दोनों देशों के बीच लाइन ऑफ कंट्रोल पर अधिकारिक बंटवारा नहीं हुआ है। लद्दाख में भारतीय सेना की ओर से निर्माण कार्य किया जा रहा है जिसको लेकर चीन ने आपत्ति जताई है। चीन का दावा है कि भारत उसके इलाके में निर्माण कर रहा है।  पेंगॉन्ग सो में हिंसक झड़प के बाद पांच मई से ही भारत और चीन की सेना के बीच गतिरोध चल रहा है । पेंगॉन्ग सो झील के पास फिंगर इलाके में भारत द्वारा महत्वपूर्ण सड़क बनाने पर चीन ने कड़ा ऐतराज किया था।

इसके अलावा गलवान घाटी में दरबुक-शायोक-दौलत बेग ओल्डी रोड को जोड़ने वाली सड़क पर भी चीन ने आपत्ति जतायी थी। इसके बाद से ही दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। छह जून को सैन्य स्तरीय वार्ता के दौरान भारत और चीन 2018 में वुहान शिखर बैठक में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के आधार पर फैसला करने पर सहमत हुए थे। छह जून को लेह की 14 वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और तिब्बती सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल लिउ लिन के बीच समग्र बैठक हुई थी।

बोला चीन – एकतरफा कार्यवाही से बचे भारत

ड्रैगन ने एक बार फिर चोरी और सीना जोरी का काम किया है। गलवन घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन ने “भारत से एकतरफा कार्रवाई करने  या तनाव बढ़ाने से बचने” को कहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह जानकारी दी। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से यह टिप्पणी की गई है। चीन अधिकारियों ने भारत पर अपने क्षेत्र में घुसपैठ का भी आरोप लगाया है।

क्या है तनाव का मुख्य कारण

भारत और चीन के बीच सीमा पर पिछले कई हफ़्तों से तनाव की स्थिति है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देश अपने सैनिकों की मौजूदगी बढ़ा रहे थे। अक्साई चीन में स्थिति गलवान घाटी को लेकर दोनों देशों के बीच इस तनाव की शुरुआत हुई थी। गलवान घाटी के किनारे चीनी सेना के कुछ टेंट देखे गए थे। इसके बाद भारत ने भी वहाँ फ़ौज की तैनाती बढ़ी दी है।

वहीं, चीन का आरोप है कि भारत गलवान घाटी के पास रक्षा संबंधी ग़ैर-क़ानूनी निर्माण कर रहा है। मई में दोनों देशों के बीच सीमा पर अलग-अलग जगह टकराव हो चुका है। नौ मई को नॉर्थ सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों में झड़प हुई थी। उसी दौरान लद्दाख़ में एलएसी के पास चीनी सेना के हेलिकॉप्टर देखे गए थे। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने भी सुखोई समेत दूसरे लड़ाकू विमानों से पेट्रोलिंग शुरू कर दी। सोमवार को वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने भी चीन का ज़िक्र किया था।

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