लंका थाने की वायरल होती कथित वसूली लिस्ट, जाने अनटोल्ड स्टोरी और हकीकत की कहानी

तारिक आज़मी संग ए जावेद

वाराणसी। वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र के चितईपुर पुलिस चौकी की एक कथित वसूली लिस्ट जारी हुई है। लिस्ट जारी करने वाले ने आरोप लगाया है कि ये वसूली स्थानीय चौकी इंचार्ज को जाती है। लिस्ट देख कर आपको हंसी भी आ जायेगी साथ ही लिस्ट बनाने वाले साहब बहादुर की अक्ल को भी आप समझ जायेगे। लिस्ट कुछ ऐसी है जिसको देख कर आप खुद परेशान हो जायेगे कि ये वसूली है या फिर दुर्गापूजा पंडाल के लिए चंदा। जिस प्रकार से वसूली लिस्ट में रकम लिखी है उतना तो आराम से लड़के दुर्गापूजा का चंदा उतार लेते है।

वैसे इस चौकी पर तैनात एसआई अर्जुन सिंह को मैं काफी पहले से जानता हु। जब वह ट्रेनिंग पर थे तब से। मैंने खुद उनके चौकी इंचार्ज रहते हुवे एक दूकान के सम्बन्ध में उनके खिलाफ में खबर लिखा था। इस बात का ज़िक्र इस लिए कर रहा हु ताकि कोई ये न समझे कि मेरी बहुत अच्छी बनती होगी। स्पष्ट है कि सम्बन्ध एक पत्रकार और एक पुलिस वाला ही है। मगर एक बात और भी है जो वास्तविकता के साथ है कि इतने वर्षो में जो जाना वह ये है कि अर्जुन सिंह एक अति सभ्य परिवार से सम्बंधित है। कभी शायद जीवन में एक सुपारी भी नहीं खाई होगी। नशे से एलर्जी रखने वाले शख्स पर ऐसे आरोपों पर कोई भी विश्वास नही कर रहा है।

बहरहाल, लिस्ट के बनिस्बत हमने भी तस्दीक करने के लिए अपने कदम चितईपुर चौकी क्षेत्र के तरफ खूब बढाए। बड़ी जानकारी इकठ्ठा करने की कोशिश किया। लिस्ट जारी करने वाले किसी का पता तो नही चला मगर हैण्ड राईटिंग बहुत कुछ कह गयी। असल में लम्बे समय तक आराम तलबी और आने जाने वाले वाहनों से 100-50 का खेल अगर रोक दिया जाए तो ऐसी घटनाये अचानक सामने आ जाती है। ऐसी ही एक लिस्ट वायरल एक सज्जन तत्कालीन मुग़लसराय थाना प्रभारी शिवानन्द मिश्रा के सम्बन्ध में भी किया था। नतीजा सिफर ही जाँच में निकला। भले ही लम्बे समय तक मुगलसराय में रहे शिवानन्द मिश्रा का ट्रांसफर हो गया मगर लिस्ट की वास्तविकता शुन्य निकली।

हमने भी इस लिस्ट की वास्तविकता के सम्बन्ध में जानकारी इकठ्ठा काना चाहा। सबसे पहले हमने आदित्यनगर, सुसवाही और वृन्दावन में हम गैस रिफिल करवाने के लिए भटके मगर हमारी जानकारी में कोई ऐसा व्यक्ति नही आया जो गैस रिफिल करता हो। लगता है दीवान जी को थोडा जल्दी थी वरना नाम भी बता देते तो हम नाम भी तलाश लेते। क्षेत्रीय नागरिको से काफी जानकारी करना चाहा कि कही गैस रिफिल हो जाएगी तो सभी गैस एजेंसी का पता बताकर कह रहे थे कि वहा गैस मिलती है। कमाल हो गया साहब, गैस एजेंसी में गैस मिलती है तो इसकी जानकारी हमको भी थी। मगर कसम से दीवान जी, केहू न बताईस कि के करेला छोटका गैस सिलंडर में रिफलिंग।

बहरहाल, वैसे तो कभी हमने गांजा भाग जैसे विशेष शक्तिवर्धक पदार्थो का सेवन नही किया। मगर लिस्ट में सबसे बड़ी रकम जो दिखाई दी तो उसके आधार पर हम चितईपुर चौराहे के पास भांग की दूकान पर पहुच गए। दूकान पर एक काका किस्म के शख्स बैठे थे और उनको देख कर लग रहा था कि कक्का के ठंडा नहीं लगता है का ? बहरहाल, हमने कक्का से कहा कक्का तनिक काम ब, ऊ ई की एक पुडिया गांजा मिल जात ता हमार काम बन जात। ऐसा लगा काका की धोती मांग लिया हो। बुज़ुर्ग शख्स बुरी तरह भड़क गए। कहने लगे ई तोहका गांजा का दूकान दिखात ब, हमके बदनाम करे बदे तोहका के भेजलस, और इसी एक टर्र के साथ कक्का हमारे तो पीछे ही पड़ गए। बड़ी मुश्किल से उनसे जान छुड़ाने के लिए हमको कहना पड़ गया की अरे ऊ काका एक थे लिस्ट जारी भयल बा जिमन्वा तोहार दुकाने का पता बा की तू गांजा बदे पईसा देवेला।

बापू फिर भड़क पड़े। कहने लगे क्या हम हराम का कारोबार कर रहे है। मेहनत का कमाई हमारे लिए नहीं है। गांजा बेचेगे। ऊहे हवा उडईले बा जेकरा के हम न कह देहले रहली। कई बरस से पीछु पडल रहल। जब हम ओकरा शिकायत थानादार साहब से कर देहली त अब ई करत बा। ओकरा के कऊनो सुझबुझ न बा बबुआ, तू त पढ़ल लिखल लगत हऊआ तोहका सोचे के चाहि न का कहत हऊवा। किसी तरह हमने कक्का से अपनी जान छुड़ाई। और निकल लिए। वरना कक्का अभी एक घंटा और सुनाते रहते।

हमने इस बात को तो समझ लिया था कि वसूली लिस्ट कितनी अथेंटिक है। लिस्ट के अधिकतर जगहो पर हमारे सहयोगियों और सूत्रों ने जाकर अपने अनुसार जानकारी इकठ्ठा किया मगर नतीजा सिफर ही निकला। एक का तो जवाब बड़ा शानदार था। बोला, नमकीन, चना बेच के दूकान में जगह का किराया देने के बाद घर में रोटी पक जाती है। खुद बीडी पीकर काम चला लेते है, किसी को देने के लिए होना भी चाहिए कि ऐसे ही दे देंगे। बात तो उसकी भी ठीक थी।

बहरहाल, प्रकरण में जाँच का आदेश हो चूका है। जाँच एसपी क्राइम स्वयं कर रहे है। जिसके आधार पर कार्यवाही भी होगी। वैसे पुलिस सूत्रों की माने तो चौकी से हटाये गए एक साहब की कारस्तानी केवल इस कारण है कि उनकी खुद की पकड़ इस इलाके में थी। अच्छी खासी बिना कुछ किये नौकरी चल रही थी। अब फैंटम में लगकर अथवा अन्य कार्यो में लगाए जाने के बाद मेहनत करना होगा। वैसे वो साहब थाना क्षेत्र में काफी चर्चित है। उनके साथी ही उनकी बात पर मुस्कुरा देते है। सूत्र बताते है कि साहब बहादुर ने लिस्ट में ये भी ध्यान नही दिया कि लिस्ट खुद की हैण्ड राईटिंग में नही बनाना चाहिए। एक सूत्र ने दावे के साथ कहा कि उनकी ही हैण्ड राइटिंग है। जाँच एक बार लिस्ट वायरल करने वाले साहब बहादुर की भी होनी चाहिए। कम से कम दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। अन्यथा रोज़ ही कोई न कोई किसी न किसी पुलिस महकमे के अधिकारी अथवा कर्मचारी पर आरोप लगा बैठेगा कि अमुक जगह से इस तरह की वसूली होती है ये रही लिस्ट। इस लिस्टबाज़ी पर उत्तर प्रदेश पुलिस को लगाम तो लगानी ही चाहिए।

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