भारत नेपाल बार्डर पर तैनात एसएसबी 12 कुत्तों को बनाएगी सुपर डॉग, सूंघकर पकड़ेंगे विस्फोटक

फारुख हुसैन

पलियाकलां खीरी। भारत नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात एसएसबी ने 12 कुत्तों की 14 दिवसीय ट्रेनिंग का कार्य शुरू कर दिया है। ट्रेनिंग के बाद बॉर्डर की सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हुए यह सभी डॉग सुपर डॉग के नाम से जाने जाएंगे। सुरक्षा में तैनात जवान के साथ यह प्रशिक्षित डॉग बड़ी आसानी से विस्फोटक व मादक पदार्थों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। एसएसबी गदनिया मुख्यालय पर सभी होनहार डॉग्स की ट्रेनिंग का कार्य किया जा रहा है। 14 दिनों की ट्रेनिंग के बाद यह सभी हुनर बंद डॉग्स एसएसबी टीम का हिस्सा बन जाएंगे।

भारत नेपाल सीमा से सटे बॉर्डर इलाके में मादक पदार्थों की तस्करी का कार्य दशकों से होता चला रहा है। इसके साथ ही अराजक तत्व किसी विस्फोटक सामग्री के साथ बॉर्डर में ना दाखिल हो सके इसको लेकर बॉर्डर पर सुरक्षा में तैनात एसएसबी ने कवायद शुरू की है। दुनिया भर में सूंघने की क्षमता में माहिर विशेष नस्ल के 12 कुत्तों की टीम को 14 दिवसीय ट्रेनिंग खीरी और गोरखपुर में शुरू की गई है। ट्रेनिंग के पूरे होने के बाद यह सभी हुनरमंद डॉग सुपर डॉग्स की श्रेणी में शामिल होते हुए बॉर्डर पर तैनात एसएसबी का हिस्सा बन जाएंगे। अपनी सूंघने की छमता से यह डॉग्स बड़ी आसानी से मादक पदार्थों के साथ विस्फोटक सामग्री का पता लगाने में जवानों की मदद करेंगे।

डॉक्टर पूजा सभी डॉग्स को बनाएंगे सुपर डॉग

विशेष नस्ल के सभी 12 डॉग को प्रशिक्षक के रूप में फर्सवान सहायक कमांडेंट पशु चिकित्सा डा. पूजा ट्रेनिंग देंगी। ट्रेनिंग पूर्ण होने के बाद डॉग्स सुपर डॉग्स बन जाएंगे। संपूर्णानगर रोड स्थित एसएसबी 39वीं वाहिनी गदनिया मुख्यालय पर 57वीं वाहिनी के कुशल नेतृत्व में 17 नवंबर से श्वान दस्ते की ट्रेनिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है जो कि 30 नवंबर तक चलेगा।

क्या है प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्वानों को परिचालन कार्यों में और अधिक निपुणता प्रदान करना है। डॉग दस्ते को सशस्त्र सीमा बल के कुशल प्रशिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

45 मिनट रेस्ट, 45 मिनट फिर दी जाती है ट्रेनिंग   एसएसपी 39 वीं वाहिनी गदनिया मुख्यालय पर विशेष नस्ल के 12 डॉग्स को सुपर डॉग्स बनाने की दी जा रही ट्रेनिंग के दौरान उन्हें 45 मिनट की ट्रेनिंग के बाद फिर 45 मिनट रेस्ट दिया जाता है। इसी तरह उन्हें दिन में लगातार रेस्ट और ट्रेनिंग देने का कार्य किया जा रहा है।

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