हरियाणा निकाय चुनाव – भाजपा और उसके सहयोगी को मिली उसके ही गढ़ में शिकस्त, जाने क्या रही इस हार की वजह

तरुण गौड/ आँचल गौड़

अम्बाला छावनी. हरियाणा में 27 दिसंबर को संपन्न निकाय चुनाव के नतीजे बुधवार को आ गए। सोनीपत, पंचकूला और अंबाला नगर निगम में मेयर पद के लिए पहली बार सीधे वोट डाले गए थे। इसमें भाजपा के खाते में पंचकूला और कांग्रेस के खाते में सोनीपत मेयर पद आया। अंबाला मेयर पद का चुनाव पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी और हरियाणा जन चेतना पार्टी की उम्मीदवार शक्ति रानी ने जीता। रेवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की। वहीं सांपला, धारुहेड़ा और उकलाना नगरपालिका में निर्दलीयों की जीत का डंका बजा। इस बार मेयर, नगर परिषद और नगरपालिका अध्यक्ष के लिए सीधे चुनाव हुआ है।

गौरतलब हो कि अंबाला, पंचकूला, सोनीपत, रेवारी के धरुहेरा, रोहतक के सांपला और हिसार के उकालना में बीते रविवार को नगर निगम के चुनाव हुए थे। बुधवार को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई थी। यहां बीजेपी-जेजेपी की हार के पीछे किसान आंदोलन को माना जा रहा है। नगर निगम के चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन को सोनीपत और अंबाला की मेयर की सीट से हाथ धोना पड़ा है। उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी हिसार के उकालना और रेवारी के धरुहेरा में अपने घर के मैदान में चुनाव हार गई है।  यह बड़ा झटका गठबंधन को राज्य के चुनावों के अगले साल ही सहना पड़ रहा है।

कांग्रेस की सोनीपत में 14,000 वोटों से जीत हुई है। निखिल मदान सोनीपत के पहले मेयर बनेंगे। कांग्रेस का दावा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ गुस्से के चलते बीजेपी को हारना पड़ा है। कांग्रेस नेता श्रीवत्स ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस बड़े अंतर से सोनीपत के मेयर का चुनाव जीत गई है। कांग्रेस: 72,111, BJP: 58,300। ध्यान दें कि सोनीपत सिंघू बॉर्डर के ठीक बगल में है और हरियाणा के किसान आंदोलन का केंद्र है। वही भाजपा की गठबंधन पार्टी जेजेपी रेवारी और हिसार की अपनी सीटों से हाथ धो चुकी है।

बताते चले कि पिछले महीने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार की तब बहुत आलोचना हुई थी, जब यहां पर प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के उनपर वॉटर कैनन और लाठियां चलवाई गई थीं। किसान आंदोलन ने जेजेपी को तब धर्मसंकट में डाल दिया था, जब पार्टी की पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने हाल ही में बीजेपी-नीत एनडीए से नाता तोड़ लिया था। अकाली दल ने कृषि कानूनों के विरोध में गठबंधन छोड़ा था। इसके बाद दुष्यंत चौटाला ने भी कहा था कि वो किसानों को मिनिमम सपोर्ट प्राइस सुनिश्चित न किए जाने की स्थिति में एनडीए छोड़ देंगे। पिछले हफ्ते उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र- जींद के ऊचां कलां- में गांव वालों का विरोध झेलना पड़ा था, जहां लोगों ने उनके लिए बनाए गए हैलीपैड को खोद दिया था। इसी तरह हरियाणा के कई गांवों ने गठबंधन के नेताओं की एंट्री को बंद कर दिया था।

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