नहीं कम हो रही डॉ0 कफील खान की मुश्किलें, डॉ कफील के रिहाई आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा

तारिक़ खान

नई दिल्ली: डॉ कफील खान की मुश्किलें कम होने का नाम ही नही ले रही है। महीनो तक जेल में गुज़ारने के बाद फरवरी में जब उनको ज़मानत मिली तो उसी समय उनके ऊपर एनएसए लगा दिया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के हाई कोर्ट ने डॉ कफील को ज़मानत दिया, मथुरा जेल से रिहा होने के बाद डॉ कफील की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही है।

अब उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ एक याचिका दायर की है जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ एक कथित भाषण के लिए एनएसए के तहत आरोपित एक डॉक्टर को रिहा किया गया था। उच्च न्यायालय ने 1 सितंबर को अपने आदेश में कहा था, उत्तर प्रदेश के डॉक्टर कफील खान की हिरासत “गैरकानूनी” थी, आदेश में आगे कहा गया था कि डॉक्टर के भाषण ने नफरत या हिंसा को बढ़ावा देने के लिए कोई प्रयास नहीं दिखाई देता है।

अब सुप्रीम कोर्ट की याचिका में यूपी सरकार ने आरोप लगाया है कि डॉ खान का अपराध करने का इतिहास रहा है, जिसके कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई, सेवा से निलंबन, पुलिस मामलों का पंजीकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए। गोरखपुर के डॉक्टर को 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। जबकि उन पर धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए पहली बार आरोप लगाया गया था, इस साल 10 फरवरी को जमानत दिए जाने के बाद एनएसए के तहत आरोप लगाए गए थे।

डॉ0 खान को मथुरा की एक जेल से रिहा किए जाने के बाद, उन्होंने कहा था कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहेंगे कि वह उन्हें राज्य चिकित्सा सेवाओं में नौकरी दे दें। सरकारी अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी के कारण 2017 में कई बच्चों की मौत के बाद गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से उन्हें निलंबित कर दिया गया था। एक विभागीय जांच ने बाद में डॉ खान पर अधिकांश आरोपों से बरी हो गए,  लेकिन उन्होंने संशोधित नागरिकता कानून के तहत अलीगढ़ में कथित रूप से भड़काऊ भाषण के लिए खुद को मुसीबत में पाया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *