गाज़ियाबाद शमशान घाट हादसे पर अनिल मेहता की कलम से – कौन कहता है उ०प्र० सरकार में भ्रष्टाचार नहीं होता ?

(अनिल मेहता)

गाजियाबाद के मुराद नगर मे श्मशान घाट की छत गिरने से जो भारी दुर्घटना हुई है। वह प्रशासनिक लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण है। उ०प्र० सरकार अपनी ईमानदारी का ढिंढोरा पीटती रहती है। उसकी ईमानदारी का प्रत्यक्ष उदाहरण गाजियाबाद के मुराद नगर की श्मशान की छत है, जो अब तक 23 बेगुनाहों की जिंदगी लील गई।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि जब श्मशान की बाउन्ड्री वॉल गिरी थी तभी ठेकेदार के कार्य का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था, तथा ठेकेदार पर आरोप लगाया था कि वह निर्माण मे ठीक सामग्री नहीं लगा रहा है। पर स्थानीय प्रशासन आँखें मूंदे रहा। जिसका भयावह परिणाम सामने आया। क्या समझा जाये अफसरशाही पर उ०प्र० सरकार की पकड़ बिल्कुल नहीं है? या अधिकारियों पर उ०प्र० सरकार का भय बिल्कुल ही नहीं है?

ऐसा ही लगता है। ,प्रशासनिक अधिकारियों पर उ०प्र० सरकार की ढीली पकड़ साफ नज़र आती है। घटना के बाद उ० प्र० के मुख्यमन्त्री से लेकर सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब। इस घटना की जाँच करवाई जायेगी और जो दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही होगी। लोकतांत्रिक सरकारों मे हमेशा से ये होता आया है और लापरवाह बचते रहे हैं। इस घटना के बाद कौन कहेगा उ० प्र० सरकार में भ्रष्टाचार नहीं होता।

(लेखक अनिल मेहता, लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र पब्लिक पावर के प्रधान संपादक है और समसामायिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए मशहूर है।)

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