किसान आन्दोलन – बेनतीजा रही सातवे दौर की भी वार्ता, वार्ता के बाद बोले किसान नेता – मंत्री ने कहा कानून रद्द करवाना है तो सुप्रीम कोर्ट जाइये

आफताब फारुकी

नई दिल्ली: कृषि कानून के मुद्दे पर हाड कपा देने वाली ठण्ड में भी आन्दोलनरत किसानो और सरकार के बीच आज सातवे दौर की बातचीत बेनतीजा रही। आन्दोलनकारी किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की बात पर अडिग रहे वही सरकार की तरफ से सुधार करने की बात की गई। मिल रही जानकारी के अनुसार, इस बातचीत के दूसरे दौर में सरकार ने न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य का ‘कानूनी रूप’ देने पर बातचीत का प्रस्‍ताव रखा था लेकिन किसान यूनियन के नेताओं ने इस पर चर्चा से इनकार कर दिया। वे कृषि कानून को निरस्‍त करने की अपनी मांग पर अडिग रहे।

आज सोमवार की बातचीत शुरू होने से पहले आंदोलन में मारे गए लोगों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।दिल्ली में भारी बारिश और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद किसान सिंघु बॉर्डर समेत कई सीमाओं पर मोर्चेबंदी पर डटे हुए हैं। किसानों ने अल्टीमेटम दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। आखिरी दौर की बैठक में सरकार ने किसानों की दो मांगें मान ली थीं। सरकार ने बिजली संशोधन बिल को वापस लेने और पराली जलाने से रोकने के लिए बने वायु गुणवत्ता आयोग अध्यादेश में बदलाव का भरोसा किसान नेताओं को दिया था। हालांकि कृषि कानूनों पर पेंच फंसा हुआ है। किसान सितंबर से ही इन कानूनों का विरोध करते हुए आंदोलन कर रहे हैं। दिल्ली की कई सीमाओं पर किसान 26 नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं। बैठक से पहले ही किसान संगठनों के नेताओं ने  कह दिया था कि वे  सरकार के सामने नया विकल्प नहीं रखेंगे।

दरअसल, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पिछली बैठक में किसान संगठनों से अनुरोध किया था कि कृषि सुधार कानूनों के संबंध में अपनी मांग के अन्य विकल्प दें, जिस पर सरकार विचार करेगी। पिछली बैठक में शामिल किसान नेताओं ने कहा था कि सरकार ने संकेत दिया है कि वह कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी। उसने इसे लंबी और जटिल प्रक्रिया बताया था। वार्ता में भाग लेने वाले किसान मज‍दूर संघर्ष कमेटी के सरवन सिंह पंधेर के अनुसार, ”कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने साफतौर पर कहा कि कानून रद्द नहीं किए जाएंगे, उन्‍होंने हमसे यहां तक कहा कि कानून रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण लीजिए।’ पंधेर ने कहा, ‘हमने पंजाब के युवाओं से लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा है। हम गणतंत्र दिवस पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे।”

वही दूसरी तरफ, वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस बात से इनकार किया कि किसान यूनियन को सरकार पर भरोसा नहीं है। उन्‍होंने कहा कि सरकार और यूनियन की रजामंदी से ही आठ तारीख की बैठक तय हुई है इसका मतलब है कि किसानों को सरकार पर भरोसा है। उन्‍होंने कहा कि किसानों की भी मंशा है कि सरकार रास्‍ता तलाशे और आंदोलन खत्‍म करने की स्थिति तैयार हो। चर्चा में दो अहम विषय एमएसपी और कानून थे, कुल मिलाकर चर्चा अच्‍छे वातावरण में हुई, दोनों पक्ष चाहते हैं कि समाधान निकले। सरकार ने कानून बनाया है तो किसानों के हित को ध्‍यान में रखकर बनाया है। हम चाहते हैं कि यूनियन की तरफ से वह बात आए जिस पर किसानों को ऐतराज है, इस पर सरकार खुले मन से बातचीत करने को तैयार है।

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