किसान आन्दोलन – फिर बढ़ी तम्बुओ की तायदात, फिर शुरू हुआ लंगर, गाजीपुर बॉर्डर पर बस गया है अस्थाई गाव, जाने मौजूदा हालात

आदिल अहमद

नई दिल्ली. तम्बू दुबारा लगने शुरू हो गए है। किसानो की तय्दात में इजाफा हो गया है। लंगर दुबारा शुरू हो चूका है। कृषि कानूनों के विरोध में दो महीने से चले आ रहे आंदोलन में बृहस्पतिवार की घटना ने नई जान डाल दी है। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद किसानों का गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। बीते 36 घंटों में आंदोलन स्थल का दायरा करीब चार गुना बढ़ गया है और किसानों की संख्या बढ़कर आठ से दस हजार तक पहुंच गई है।  26 जनवरी की घटना के बाद जो तंबू उखड़ने शुरू हो गए थे और लंगर बंद कर दिए गए थे वो शुक्रवार को फिर से लगने शुरू हो गए। अचानक से आंदोलन स्थल पर पूरा नजारा बदल तो धरने में बैठे किसानों में भी नई ऊर्जा देखने को मिली।

26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद खत्म होते दिख रहे आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसूओं ने जैसे संजीवनी दे दी। पिछले 66 दिनों से चल रहा जो आंदोलन 28 नवंबर को गाजीपुर बॉर्डर से शाम तक खत्म जैसा दिख रहा था वह टिकैत के आंसुओं का वीडियो वायरल होते भी फिर तेज हो गया और 29 जनवरी की सुबह गाजीपुर बॉर्डर हाल वैसा दिखने लगा जैसे वो 26 तारीख से पहले था। यही नहीं अब की लोगों में जोश भी दोगुना है और वो कृषि कानूनोें को वापस कराकर ही घर जाने की बात कर रहे हैं। वहीं सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर भी आंदोलन जारी है। वहीं आज आंदोलन कर रहे किसान 26 जनवरी की हिंसा पर दुख जताते हुए और महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में एक दिन के अनशन पर रहेंगे। किसान आज के दिन को सद्भावना दिवस के रूप में मना रहे हैं।

राकेश टिकैत की अपील के बाद बृहस्पतिवार रात से किसानों का बड़ी संख्या में जल लेकर गाजीपुर बॉर्डर पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ जो शुक्रवार देर रात तक जारी रहा। पश्चिमी यूपी में मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, बुलंदशहर, हापुड़ व अन्य जिलों से रात में ही किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। इसके साथ ही हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड से भी किसान बड़ी संख्या में आंदोलन स्थल पर पहुंचे। शुक्रवार की सुबह सामान्य दिनों की तहत मंच सजा तो जमकर सरकार के खिलाफ किसान नेताओं ने आग उगली।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष शिशौदिया से लेकर कांग्रेस से अलका लांबा, रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी समेत अन्य बड़े नेता भी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। किसानों की अचानक से संख्या बढ़ती तो यूपी गेट अंडरपास और दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर नोएडा सेक्टर-62 की तरफ तंबू और टेंट को लगने का दौर भी शुरू हो गए। उधर, आंदोलन का रुख बदला तो प्रशासन ने भी पानी-बिजली की सप्लाई शुरू कर दी।

राकेश टिकैत ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर किसानों ने सम्मान के साथ आंदोलन शुरू किया था। अपने सम्मान को आगे भी बरकरार रखा जाएगा। किसानों पर पत्थर नहीं, फूल बरसाए जाएंगे। किसानों को बदनाम करने की हुई दो बड़ी साजिश नाकाम हो गई हैं। ऐसे में किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ जंग को किसान जीतकर जाएंगे। उन्होंने किसान आंदोलन में समर्थन देने आए लोगों से शांति का दान देने की अपील की।

उपवास पर है किसान

इस दरमियान आज किसान संगठनों के नेताओं ने 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सद्भावना दिवस के रूप में मना रहे है. इस कर्यक्रम के मद्देनज़र किसान उपवास पर है। किसान नेताओं ने दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आज सुबह सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपवास रखने की बात कही थी। उन्होंने देश के लोगों से किसानों के साथ जुड़ने की अपील किया था।

हिंसा के आरोप में 44 गिरफ्तार

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप में अब तक 44 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें दिल्ली-हरियाणा सिंघू बॉर्डर पर झड़पों के दौरान शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी पर तलवार से  हमला करने वाला व्यक्ति भी शामिल है। तीन कृषि  कानूनों के खिलाफ दो महीने से भी ज्यादा समय से किसान दिल्ली के अलग-अलग सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

दिल्ली सीमाओं के तरफ बढ़ रहे है किसान

किसान संगठनों ने शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा के किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लामबंद करना शुरू कर दिया है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल और इनेलो जैसे राजनीतिक दलों ने भी किसानों का साथ देने की घोषणा की है। किसान नेताओं ने दावा किया कि जींद, हिसार, भिवानी और रोहतक सहित हरियाणा के कई हिस्सों से किसानों ने केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली की सीमाओं की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है।

भारतीय किसान यूनियन (चडूनी) के एक नेता ने कहा कि हरियाणा में कई खाप पंचायतों ने बैठकें कीं और किसान आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि कई गांवों ने प्रदर्शन में अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली भेजने का फैसला किया है। शिरोमणि अकाली दल ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दिल्ली की सीमाओं पर तीन प्रदर्शन स्थलों पर आंदोलन को मजबूती देने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचें।

गाजीपुर बॉर्डर पर धरना स्थल के आसपास 500 मीटर तक इंटरनेट सेवा बंद

गाजीपुर बॉर्डर पर 29 जनवरी से बढ़ रही भीड़ के बाद अब धरनास्थल से 500 मीटर की दूरी तक इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो।

सिंघु बॉर्डरः एनएच-1 पर पुलिस खोद रही गहरी खाइयां

26 जनवरी के दिन जिस तरह से ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा हुई उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर खोदाई शुरू कर दी है। यह खाई सिंघु बॉर्डर पर इसलिए की जा रही है क्योंकि अगर कोई ट्रैक्टर लेकर दिल्ली की सीमा में प्रवेश भी करना चाहे तो ट्रैक्टर खाई में गिरकर फंस जाए।

कल दिल्ली कूच करेंगे बागपत से किसान

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने आज कहा कि, कल बागपत में पंचायत करने के बाद हम दिल्ली कूच करेंगे। किसानों पर जो राजनीति हो रही है उस पर पंचायत में चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि, कृषि कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बाॅर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 64वें दिन भी जारी है।

सिंघु बॉर्डर पर बढ़ाई सुरक्षा

सिंघु बॉर्डर पर भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध-प्रदर्शन जारी है। सुरक्षा व्यवस्था इसलिए भी चौकस की गई है कि बीते दो दिनों से कुछ स्थानीय लोग यहां आकर किसानों से सड़क खाली करने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। शुक्रवार को तो यहां हिंसक झड़प भी हो गई थी जिसके बाद पुलिस ने 44 लोगों को गिरफ्तार किया।

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