लखीमपुर खीरी – अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाने वाले पिता महेश को हुई उम्र कैद की सजा

फारुख हुसैन

लखीमपुर खीरी। वो एक सभ्य समाज के लिए कलंक से अधिक कुछ नही है। एक पिता अपनी बेटी का रक्षक होता है। मगर ये निर्लज पिता ने खुद अपनी नाबालिग बेटी को ही अपनी हवस का शिकार बना दिया था। आज अदालत ने महेश को अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने के आरोप में दोष सिद्ध पाते हुवे उम्र कैद की सजा सुनाई है। सजा पाक्सो अदालत के अपर जिला जज राजेश कुमार मिश्र ने सुनाई है। जज ने दोषी महेश पर बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मैलानी थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली किशोरी के साथ 22 सितंबर 2018 की रात को उसके पिता महेश कुमार ने दुष्कर्म करने के साथ ही जान से मार डालने की धमकी दी थी। पिता की हरकत से परेशान हो किशोरी ने अपनी ननिहाल पहुंचकर मामी और मामा राजेश कुमार को पूरी बात बताई, साथ ही मिल रही धमकी की जानकारी दी। तब मामा ने थाना मैलानी पहुंचकर घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस तफ्तीश में आरोपों की पुष्टि हुई, और फिर उसके बाद रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी महेश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वहीं चिकित्सीय जांच व अन्य सबूत भी दुष्कर्मी पिता के खिलाफ गवाही दिए थे।

प्रकरण में विशेष अभियोजक संजय सिंह ने बताया आरोपी महेश की पत्नी का देहांत होने के बाद उसने अपनी ही पुत्री को हवस का शिकार बनाया था। इस मामले में राजेश, सुमन देवी, डॉ। अर्चना कुमार कांस्टेबल अरविंद कुमार और एसएचओ बृजेश कुमार त्रिपाठी ने भी अपनी गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नहीं लगने दी। अदालत ने सुनवाई के बाद दुष्कर्मी को उम्रकैद की सजा सुनाई है, साथ ही उसे बीस हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में नाबालिग किशोरी के प्रति संवेदना जताते हुए अपने फैसले में व्यवस्था दी है कि वसूली गई जुर्माना की रकम में से पीड़िता को बीस हजार रुपये की धनराशि बतौर मुआवजा अदा की जाएगी।

नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए शनिवार को जेल से जब आरोपी तलब किया गया तो आरोपी बोला कि वह सीधा-सादा है और उसका कोई पुराना आपराधिक इतिहास भी नहीं है। ऐसे में उसे कम से कम सजा दी जाए। न्यायाधीश राजेश मिश्र ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए जब आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई तो वह कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया। वही नाबालिग बच्ची के ननिहाल में और महेश के रिहाइशी क्षेत्र में जब इस सजा की जानकारी पहुची तो सभी ने ख़ुशी ज़ाहिर किया। लोगो का कहना था कि ऐसे कुकर्मी और निर्लज्ज पिता को तो फांसी की सजा होनी चाहिए थी।

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