विकास दुबे के 7 मददगार चढ़े यूपी एसटीऍफ़ के हत्थे, हथियार नही हथियारों का जखीरा हुआ बरामद

आदिल अहमद

कानपुर। कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड के सूत्रधार पुलिस एनकाउंटर में ढेर हुवा अपराधी विकास दुबे भले एक हफ्ते तक लगभग पुलिस के आँखों में धुल झोक्ता रहा हो। मगर अब पुलिस ने उसके पुरे साम्राज्य को समाप्त करने का प्रण ले रखा है। अभियान कुछ इस तरीके से चलाया जा रहा है कि विकास दुबे का गैंग फिर कभी सांस भी न ले पाए।

इसी क्रम में कानपुर के बिकरू कांड के सूत्रधार विकास दुबे प्रकरण में उसे फरार करने वाले उसके सात सहयोगियों को एसटीऍफ़ ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ़्तारी में एसटीएफ ने आरोपियों के पास से एक सेमी ऑटोमैटिक राइफल, 9 एमएम  कार्बाइन, एक रिवॉल्वर, 315 बोर के तमंचे, एके-47 के कारतूस, स्प्रिंग फील्ड राइफल समेत करीब 132 कारतूस बरामद किए हैं। इसके साथ ही एसटीएफ ने विकास दुबे का आईफोन, अमर और प्रभात के मोबाइल भी बरामद किए हैं। आरोपियों के पास से दो लाख पांच हजार नगद मिले हैं। साथ ही एसटीएफ ने वह कार भी बरामद कर ली है जिससे विकास दुबे घटना को अंजाम देने के बाद फरार हुआ था। गिरफ्तार होने वालो में विष्णु कश्यप, अमन शुक्ला, रामजी उर्फ राधे, अभिनव तिवारी,मनीष यादव, संजय परिहार और शुभम पाल शामिल है।

गौरतलब हो कि कानपुर के चौबेपुर स्थित बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 की रात दबिश देने गई पुलिस टीम पर दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला कर दिया था। विकास दुबे ने साथियों की मदद से सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इसके बाद विकास दुबे रात में ही फरार हो गया था और अपने सहयोगियों के पास जाकर छिप गया था। करीब सात दिन के बाद आठ जुलाई को विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस ने महाकाल मंदिर से पकड़कर यूपी पुलिस के सुपुर्द किया था। मध्य प्रदेश से कानपुर लाते समय गाड़ी पलट जाने पर विकास ने भागने का प्रयास किया था, जिसके बाद एनकाउंटर में वह मारा गया था।

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