चोलापुर अनिल गिरी आरोप प्रकरण – सामने आया दुसरे पक्ष तिलकधारी गिरी का बयान, बताया अनिल गिरी के आरोपों को फर्जी, लगाये ये आरोप

ए जावेद/ शाहीन बनारसी

वाराणसी।  बीते दो दिनों से चर्चा में आये चोलापुर में ज़बरदस्ती सुलह करवा देने के आरोपों के बयान के बाद आज दुसरे पक्ष का भी बयान सामने आया है, इस बयान को गौर से देखे तो देख कर ही लगता है कि देनदारी को टालने के लिए आरोप लगाया जा रहा है। दुसरे पक्ष तिलकधारी गिरी ने अपना बयान जारी करते हुवे अनिल गिरी पर अमानत में खयानत का गंभीर आरोप भी लगाया है। इन आरोपों पर अगर ध्यान दे तो फिर अनिल गिरी द्वारा लगाये जा रहे आरोप बेबुनियाद साबित होते है।

दो दिनों से वायरल हो रहे चोलापुर निवासी अनिल गिरी के प्रकरण में दुसरे पक्ष तिलकधारी का बयान अब सामने आया है। तिलकधारी ने अपने कागज़ातो साथी जो कुछ बताया है उसको देख कर अनिल गिरी का आरोप ही बेबुनियाद दिखाई पड़ रहा है। तिलकधारी ने अपने बयान में बताया कि अनिल गिरी उनका रिश्तेदार है। उन्होंने लिखा पढ़ी के साथ एक एग्रीमेंट के आधार पर अपनी दो ट्रक अनिल गिरी को चलाने के लिए दिया था और निश्चित किराया तय हुआ था। अनिल गिरी ने गाडी ले जाने के बाद कुछ दिन किराया दिया। इसके अलावा एक चेक दिया जो बाद में बाउंस हो गया।

तिलकधारी ने बताया कि विगत दो वर्षो से अनिल गिरी न तो किराया दे रहा था और न ही ट्रक ही वापस कर रहा था। रिश्तेदारों से दबाव बनवाने के बाद अनिल गिरी ने जून माह में ट्रक चोलापुर में ही खडी कर दिया और ट्रक का टायर वगैरह बेच दिया। जब टायर के लिए और बकाया किराया के लिए कहा तो दे दूंगा कहकर बात को टाल गया था। जिसके बाद थाना चोलापुर में मामले से सम्बन्धित तहरीर देकर पुलिस से मदद की गुहार लगाई गई। जिस पर स्थानीय पुलिस ने मामले में जांच एसआई आशीष पटेल को सौपी और एसआई आशीष पटेल ने दोनों पक्षों को थाने पर बुला कर आमने सामने बैठा कर बात करवाया।

तिलकधारी ने बताया कि अनिल गिरी के यहाँ हमारा लगभग 8 लाख का हिसाब निकल रहा था। अनिल गिरी खुद की दयनीय स्थिति दिखाते हुवे मामले को दो लाख और एक टायर पर बात तय किया। ये बातचीत अगर किसी दबाव में हुई होती तो हम पुरे 8 लाख पर बातचीत मैं तय करता और लिखा पढ़ी करवाता। बात जब इसकी थी कि मामले को धीरे से करके निपटाना था। हम कारोबारी इंसान है। कहा कोर्ट कचहरी, थाना चौकी करेगे। इसीलिए नुकसान सह गए। इसका दूसरा कारण ये भी है कि अनिल गिरी हमारा रिश्तेदारी में भी आता है। उसकी हाल पर भी हमको ख्याल करना था।

तिलकधारी ने इस सम्बन्ध में आगे बताया कि स्टाम्प पेपर भी खुद अनिल गिरी लेकर आया था। अनिल गिरी पहले से ही स्टाम्प लेकर घर पर रखे हुवे था। अगर कोई जोर ज़बरदस्ती की बात होती तो अनिल गिरी स्टाम्प पेपर लेने घर गया था तो वापस ही नही आता। वो घर से स्टाम्प पेपर लेकर क्यों वापस आया ? ये खुद आप लोग सोच सकते है। दूसरी सबसे बड़ी बात है कि अनिल गिरी के साथ मारपीट अथवा कुछ दबाव की बात होती तो वह उसके घर के पास ही हम लोगो के काफी रिश्तेदार है, उनको सूचित कर सकता था,

क्या कहते है एसआई आशीष पटेल  

प्रकरण में अनिल गिरी ने एसआई आशीष पटेल पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है। हमने इस सम्बन्ध में एसआई आशीष पटेल से बात किया तो उन्होंने कहा कि “पुलिस का प्रयास रहता है कि पैसो के लेनदेन के मामलो में आपसी सहमती बन जाये। वैसे भी अमूमन इस प्रकार के मामलो में दोनों पक्षों को आमने सामने बैठा कर बात किया जाता है। इसी क्रम में अनिल गिरी को बुलवाया गया था। दुसरे पक्ष तिलकधारी गिरी ने 8 लाख का हिसाब दिखाया था। इन दोनों ने आपस में बातचीत करके मामले को तय कर लिया। आपसी लिखा पढ़ी के लिए स्टाम्प खुद अनिल गिरी अपने घर से लेकर आया था। किसी प्रकार की मारपीट का आरोप सरासर झूठ की बुनियाद पर रखा गया आरोप है। ऐसे आरोप पुलिस पर लगना आम बात होती जा रही है।”

क्या है हकीकत, क्या है फ़साना

बहरहाल, मामले में थाना प्रभारी को जाँच मिली है। प्रकरण सभी के संज्ञान में है। मगर हकीकत है कि पुलिस जब कानून व्यवस्था के लिए सख्त होती है तो आरोप उसके ऊपर लगता है और नर्म रहे तो भी आरोपों के घेरे में आती है। पत्रकार और पुलिस आरोप लगाने के लिए दो सबसे आसन टारगेट होते है। कही आरोप लगाना है तो पत्रकार को बिकाऊ से लेकर अन्य उपाधियो से नवाज़ दिया जाता है। वही पुलिस पर भी ऐसे ही आरोप लगते रहते है। इस मामले में हकीकत को जगजाहिर करने का काम थाना प्रभारी चोलापुर को मिला है। वह प्रकरण में जाँच कर रहे है। जाँच में सही तथ्य सामने आयेगे ऐसा सभी उम्मीद करके बैठे है।



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