जालौन ट्रेन लूटकांड : अपराध का तरीका तो कुख्यात रिजवान “अत्ता” जैसा है, अभी तक पुलिस के खाली हाथ क्यों नही सोच रहे इस मुद्दे पर, जाने कौन है आखिर अत्ता गैंग का कुख्यात “कंगारू” ?

तारिक़ आज़मी

कानपुर। उरई के सरसौखी स्टेशन के आऊटर पर 23 अगस्त की रात अज्ञात बदमाशो ने 09322 पटना इंदौर एक्सप्रेस के यात्रियों के साथ लूटपाट की थी। आरपीऍफ़ ने मामले में जाँच शुरू किया। मगर एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद जब आरपीऍफ़ के हाथ खाली रहे तो मामले में एसओजी को जाँच के लिए सौप दिया गया। मगर समाचार लिखे जाने तक एसओजी के भी हाथ खाली है। पुराने ढर्रे पर काम करती पुलिस टीम अभी भी अपराध के तरीके पर गौर नही कर रही है। बल्कि अपराधियों की तलाश में तफ्तीश जारी है के तर्ज पर काम कर रही है।

इस घटना के बाद जालौन में झांसी कानपुर रेलवे सेक्शन में पटना इंदौर एवं पुष्पक ट्रेन में हुई लूटकांड में जीआरपी झांसी के एसपी मोहम्मद इमरान ने इस मामले में जालौन एसपी रवि कुमार से मदद मांगी है। एसपी ने जालौन एसओजी को भी इस मामले के खुलासे के लिए लगा दिया है। अब एसओजी ने जीआरपी से मामले की डिटेल लेकर छानबीन शुरू कर चुकी है। मामले में कई टीमें और सर्विलांस टीम लगी हुई है। कुछ संदिग्धों से भी पूछताछ की गई है लेकिन अभी तक कोई खास सुराग हाथ नहीं लगा है। सर्विलांस टीम मोबाइल लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जीआरपी इंस्पेक्टर आरके सिंह का कहना है कि इस मामले के खुलासे में लगाई गई झांसी, आगरा आदि जगह से आई पुलिस टीमें अपने अपने स्तर से खुलासे में लगी है।

क्या रहा अपराध का तरीका

अगर गौर किया जाए तो अपराध का तरीका देखा सुना जैसा लग रहा है। इस घटना में ट्रेन रोकने के लिए सिग्नल फेल किया गया। सिग्नल फेल करने के लिए सिग्नल पर गीली मिटटी डाल कर उस पर कपडा बाँध दिया गया था। जिससे सिग्नल नही दिखाई दिया और ट्रेन के रुकते ही लूट की घटना को अंजाम दे दिया गया। वैसे जिस तरह सिग्नल में मिट्टी पोतकर घटना को अंजाम दिया गया है उससे रेलवे सकते में है। रेलवे अधिकारियों का इस बात पर भी जोर है कि घटना का खुलासा तो किया ही जाए। साथ ही इस तरह की वारदात दोबारा न हो इसके भी पुख्ता इंतजाम किए जाए। अगर गौर किया जाए तो इस तरीके से अपराध कुख्यात रिजवान अत्ता के गैंग द्वारा पहले अंजाम दिया जा चूका है।

जब अत्ता जेल में तो किसका है खेल

रिजवान अत्ता वर्त्तमान में जेल में है। रेलबाज़ार पुलिस ने भारी मात्र में चरस के साथ रिजवान अत्ता को गिरफ्तार किया था। इस्पेक्टर रवि श्रीवास्तव को मिली इस बड़ी सफलता के बाद अभी रिजवान अत्ता जेल से बाहर नही आया है। सूत्र बताते है कि पेशी के दरमियान अत्ता अपने गुर्गो से मुलाकात भी करता है। उसके गैंग के शातिर गुर्गे आज भी जेल के बाहर है। पुलिस अगर इस मुद्दे पर सोचे तो बात काफी दूर तक जाएगी। सूत्र तो ये भी बताते है कि रिजवान अपने परिवार के संपर्क में लगातार रहता है। अन्दर की बात है के तर्ज पर रिजवान अत्ता अन्दर से ही बाहर का खेला खेल सकता है।

क्या कंगारू पर पुलिस की नज़र नही है

अपराधियों को अपना मुखबिर बना कर रखने का खामियाजा पुलिस पहाले भी भुगत चुकी है। शानू टायसन से लेकर काफी नाम इस फेहरिश्त में है जो पुलिस के साथी होने की बात करते है, मगर पुलिस के लिए ही एक दिन सरदर्द साबित हो जाते है। ऐसा ही है रिजवान अत्ता का दाहिना हाथ रहा “कंगारू”। साईपुरवा, जूही का रहने वाला तनिक सैनी का बेटा गणेश “कंगारू” नाम से अपराध जगत में पुकारा जाता है। सूत्रों की माने तो कई मामलो में जेल जाने के बाद आरपीऍफ़ ने इसके कंधे पर हाथ धर दिया और ये कथित रूप से पुलिस का मुखबिर बन बैठा। मुखबिरी में भी सभी सीमा इसने तोड़ रखा है। अतिविश्वसनीय सूत्रों की माने तो “कंगारू” आरपीऍफ़ टीम के साथ दबिश पर जाता है और खुद के हाथ में अवैध असलहा लेकर खुद आगे आगे चलता है।

सूत्रों की बात पर यकीन करे तो “कंगारू” पर आरपीऍफ़ की इतनी मेहरबानी ने उसके हौसलों को काफी बढ़ा रखा है। कानपुर सेन्ट्रल रेलवे स्टेशन पर इसी मेहरबानी से बढ़ी हिम्मत के कारण वह अवैध वेंडरो का पूरा सिंडिकेट चलाता है। पुष्पक में माल लोड तक करवाने में अपनी भूमिका “कंगारू” निभा देता है। अब इसमें एक बात और भी ध्यान रखना चाहिए कि पुष्पक ट्रेन में मालवाहन डब्बा काट कर कई बात बड़ी चोरी की घटना हुई है। अभी पिछले हफ्ते भी इसी प्रकार की घटना सामने आई है जिसमे पुष्पक ट्रेन में दस लाख से अधिक का माल चोरी हुआ था।

अब अगर इन सभी मुद्दों पर गौर करे तो कंगारू की भूमिका की जाँच तो बनती है। मगर फिर सवाल यही है कि आखिर कंगारू की जाँच कौन करेगा क्योकि कंगारू तो खुद आरपीऍफ़ टीम की छापेमारी में आगे आगे चलता है।  वही सूत्रों की माने तो कंगारू इस घटना के बाद कानपुर से फरार भी हुआ था। इसके अपने संपर्क पूर्वांचल में भी काफी है। कंगारू की लोकेशन अगर मोबाइल की निकले तो एक सप्ताह में इसकी संदिग्ध भूमिका भी काफी कुछ कहती दिखाई देगी। मगर फिर वही सवाल उठता है कि जब खुद आरपीऍफ़ ने कंगारू को पाल रखा है तो उसकी भूमिका की जाँच करेगा कौन ?

नोट : अपराध और अपराधियों के सम्बन्ध में चलती हमारी इस सीरिज़ में हम आगे आपको बतायेगे कि कौन था “शानू बॉस” जिसकी अपराध की दौलत से बना उसका साथी करोडपति, साथी ही बतायेगे आज भी कानपुर और वाराणसी में जिंदा है रईस बनारसी का गैग। जुड़े रहे हमारे साथ।



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