बोल शाहीन के लब आज़ाद है तेरे : सुबह-ए-बनारस, शाम-ए-बनारस, जब देखा गुरु जाम बनारस

शाहीन बनारसी

वाराणसी। अल्हड मस्ती के लिए जाना जाने वाला शहर बनारस, भोले बाबा की नगरी काशी, विभिन्न घाटो के लिए जाना जाने वाला शहर वाराणसी, केवल इन्ही नामो से नहीं बल्कि ट्रैफिक के नाम से भी प्रसिद्ध होती चली जा रही है। मोक्ष की नगरी काशी में मोक्ष पाना तो आसान है मगर ट्राफिक जाम से निजात पाना मुश्किल होता जा रहा है। बनारस के किस मोड़, किस गली और किस सड़क पर ट्रैफिक मिल जाए गुरु, ये तो हम बनारसी भी नहीं जानते। लेकिन बाहर से घुमने आये शहर बनारस में लोग इस समय सुबह-ए-बनारस नहीं बल्कि जाम-ए-बनारस के दर्शन कर रहे है।

ये बनारस का जाम है साहब। यहां जाम में फंसे आपको इंसान या गाड़ियाँ ही नहीं दिखाई देगी बल्कि झगडे होते हुए और पडोसी मुल्क एक दुसरे को घूरते हुए भी दिखाई देंगे। बनारस की ये जाम भी ऐसा कि गाडियों से चलने वाले लोगो को तो ठहरना ही पड़ जाता है मगर पैदल चलने वाले इन तंग गलियों से मोटर गाडियों वालो को पीछे छोड़ कर आगे निकल जाते है। हर तरफ सिर्फ जाम ही जाम नजर आ रहा था। अमूमन माना जा रहा है कि त्यौहार की वजह से ये भीड़ और ये जाम है। तो वही कुछ लोगो ने कहा पंडालो की सजावट के चलते कई रास्ते बंद कर दिए जाते है जिसकी वजह से हर साल ट्रैफिक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर सड़के बन रही है जिसकी वजह से भी ये समस्या हो सकती है।

क्या है इस जाम के झाम का असली कारण

आज आपको इस जाम के झाम की कुछ तस्वीरे दिखाते है। ये तस्वीरे बिशेश्वरगंज की है। एक तरफ जहा शासन और प्रशासन अतिक्रमण पर सख्त होने की बात करता है है वही यहाँ के व्यापारी इस इस आदेश को ठेंगे पर रखकर खुद अतिक्रमण कर बैठे है। देखिये ये भाई साहब को, दूकान इनकी अन्दर 15 फिट होगी तो बाहर इन्होने 8 फिट निकाल रखा है। इनको इससे फर्क नही कि इनके कारण जाम लगता है। इनको सिर्फ इससे मतलब है कि इनका माल स्टॉक हो सके और सड़क पर ही डिस्प्ले हो सके। उसके ऊपर कोढ़ में साहब खाज ये कर बैठते है। खुद 5 फुट दूकान बाहर निकाल लिए है और उसके बाद ट्राली बाहर खडी करके उसके ऊपर माल लोड होता रहता है। जिसके बाद आधे सड़क पर सिर्फ इनका ही राज हो जाता है।

दूसरी तस्वीर में आप देख सकते है कि किस तरीके से आधी सड़क को घेर कर लोगो ने गाडियों को खड़ा कर रखा है। एक और तस्वीर को आप देखे। इतनी बड़ी बिल्डिंग बना डाली। बेसमेंट में बढ़िया पार्किंग स्थल बनाया मगर माल लोड और अनलोड तो सड़क पर ही लोडर खड़ा करके होगा। आधी सड़क लोडर ने घेर रखा था और जो बची है उसमे आप मेढक चाल की तरह चले। इन सब तस्वीरो को देख कर आपको अहसास हो जायेगा कि जाम के इस झाम में फंसी काशी में हमारा कितना योगदान है।

लेखिका शाहीन बनारसी एक युवा पत्रकार है


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