वाराणसी में मासूम बच्ची से कुकर्म कांड पर बोल शाहीन के लब आज़ाद है तेरे : एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सनबीम में हुआ ऐसा कुकर्म, और नाम उसका लेने में क्यों आ रही है शर्म

शाहीन बनारसी

वाराणसी के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में सनबीम ग्रुप आज कल चर्चा में है। पहले उसकी चर्चा का कारण था उसके स्थापना के 50 वर्ष पुरे होने पर उसके द्वारा आयोजित हो रहे कार्यक्रम। मगर कल शाम से चर्चा का मुख्य कारण बना है इस विद्यालय के एक ब्रांच में एक मासूम बच्ची के साथ हुआ बलात्कार। यह घटना अपने पीछे कई अनसुलझे सवालो के साथ विद्यालय की प्रतिष्ठा पर सवालिया निशाना लगा रही है। अचानक सोशल मीडिया पर भी इस बात को लेकर खबरनवीसी पर तंज़ कसा जा रहा है कि इतनी बड़ी घटना में विद्यालय का नाम लेने में आखिर खबरनवीसो ने क्यों परहेज़ किया?

पहले आपको घटना से रूबरू करवाते चलते है उसके बाद हम आपको उन सवालो से रूबरू करवायेगे, जिसके जवाब आज सनबीम ग्रुप के पास नही है। पहले आपको घटना बताते चलते है कि घटना आखिर हुई क्या? जिसको सुन कर आपके मुंह से लानत जैसे शब्द निकल पड़ेंगे। घटना के सम्बन्ध में मिली जानकारी और मासूम पीडिता की माँ के बयान को आधार माने तो शिवपुर थाना क्षेत्र के एक इलाके में रहने वाली महज़ 9 साल की एक मासूम बच्ची सनबीम ग्रुप के लहरतारा ब्रांच में कक्षा 3 की छात्रा थी। वह शुक्रवार को जब स्कूल से अपने घर पहुंची तब उसके कपड़ो पर खून लगा हुआ था और वह बेहद डरी-सहमी थी। माँ के पूछने पर उसने जो घटना बताया उसको सुन कर शायद राक्षस की भी रूह काँप जाए।

पीडिता की माँ के अनुसार, मासूम बच्ची ने बताया कि वह स्कूल में वाशरूम गई थी। जहाँ स्कूल का स्वीपर मौजूद था और उसने उसके साथ हरकत-ए-बेजा किया। अपनी मासूम, गुडिया जैसे बेटी के साथ ऐसी घटना की जानकारी मिलने पर माँ के होश ही फाख्ता हो गये होंगे। मासूम की माँ ने अपने पति को फ़ोन पर घटना की जानकारी दी। जिसके बाद मासूम के पिता द्वारा इसकी जानकारी पुलिस को दिया जाता है और मौके पर पुलिस पहुँचती है और छानबीन शुरू कर देती है। डीसीपी वरुणा विक्रांत वीर ने बताया कि सारे सीसीटीवी कैमरो की छानबीन करके घटना की जानकारी हासिल किया जाता है।

डीसीपी वरुणा विक्रांत वीर ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों के आधार पर आरोपी सफाईकर्मी अजय कुमार सिंकू की शिनाख्त होती है। 8 टीमो का गठन कर आरोपी सिंकू की गिरफ्तारी का प्रयास होता है और घटना के महज़ 3 घंटो के अन्दर सिंकू गिरफ्तार कर लिया जाता है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस भी गंभीरता दिख रही है। डीसीपी विक्रांत वीर ने बताया कि पुलिस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्यो से लेकर सीसीटीवी फुटेज और छोटे से छोटा सबूत भी जूटा रही है। जिससे आरोपी को अदालत में कड़ी सज़ा दिलवाई जा सके। डीसीपी विक्रांत वीर ने बताया कि आरोपी पर रासुका की भी कार्यवाही की जायेगी और केस को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की अदालत से गुज़ारिश होगी। जिससे आरोपी को जल्द-से-जल्द कड़ी-से-कड़ी सज़ा मिल सके।

क्या लापरवाह है सनबीम ग्रुप का प्रबंधतंत्र?

पीडिता की माँ के बयानों को आधार माने तो मासूम बच्ची के कपड़ो पर खून लगे हुए थे। घटना विद्यालय परिसर के अन्दर हुई थी। जिसका सीसीटीवी साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध हो चूका है। अब यहां शिक्षण संस्थान के मैनेजमेंट और सुरक्षा के ऊपर बड़ा सवाल उठता है कि घटना की जानकारी आखिर विद्यालय में वहां के प्रिंसिपल और अन्य कर्मचारियों को कैसे नहीं हुई? मासूम बच्ची के कपड़ो पर लगे खून को आखिर विद्यालय के शिक्षक और शिक्षिकाओं ने कैसे नहीं देखा? आखिर मासूम बच्ची के साथ इतनी बड़ी अमानवीय घटना की ज़िम्मेदारी से विद्यालय प्रशासन कैसे खुद का पल्ला झाड सकता है?

विद्यालय परिसर में बने वाशरूम में हुई घटना के बाद मासूम बच्ची परिसर से होती हुई घर जाने के लिए निश्चित वाहन तक आई होगी, तो फिर विद्यालय के कर्मचारियों की नज़र इस मासूम बच्ची की दुर्दशा पर क्यों नहीं पड़ी? आखिर इस घटना से शिक्षण-संस्थान सनबीम के शिक्षक और अन्य कर्मचारी कैसे अपना मुंह मोड़ सकते है? विद्यालय में प्राचार्य को कैसे इस घटना की जानकारी नहीं हुई और प्राचार्य आखिर कैसे इस घटना के लिए खुद को निर्दोष साबित कर सकते है? आखिर कैसे विद्यालय प्रबंधन बच्चो की सुरक्षा का दावा कर सकता है, जब उसके खुद के परिसर में ही एक मासूम की अस्मत ही सुरक्षित न रह सकी?

शिक्षण-संस्थान सनबीम ग्रुप अपने 50 वर्ष पुरे होने की खुशियों की ज़श्न के शोर में क्या इस मासूम की सिसकियो को दबाना चाहता था? जिस घटना की जानकारी मासूम के परिजनों को उसके घर पहुँचने पर हुई, उस घटना की जानकारी विद्यालय में किसी को न होना, आखिर कैसे संभव है? आखिर विद्यालय की शिक्षिकाओं के नज़र से मासूम बच्ची की यह दुर्दशा नहीं दिखाई दी, यह कैसे संभव है? आखिर विद्यालय प्रबंधन कैसे अपनी ज़िम्मेदारी से मुंह मोड़ सकता है? इस पोस्ट को लिखे जाने तक विद्यालय प्रबंधन ने इस घटना पर कोई कार्यवाही की हो, ये जानकारी सामने नहीं आ रही है।

सोशल मीडिया के निशाने पर स्ट्रीम मीडिया  

अजीब-ओ-गरीब खबरनवीसी के बीच खुद को नम्बर 1 साबित करने के होड़ में नम्बर 1 वालो ने अपनी खबरों में सनबीम का नाम लेने से जमकर परहेज़ किया। यह बात सोशल मीडिया यूजर्स को नागावर गुज़री तो उन्होंने अपने पोस्टो में जमकर इस खबर की और खबरनवीसी की खिल्ली उड़ाई। एक ट्वीटर यूजर्स ने तो यहाँ तक लिख दिया कि “बड़े विज्ञापन दाता सनबीम का नाम लिखने में परहेज़ करना पड़ रहा है।” कही न कही से ये सही भी दिखाई देता है कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में खबरनवीसी भी विज्ञापन पर नज़र रखती है।

लेखिका शाहीन बनारसी एक युवा पत्रकार है

बहरहाल, सनबीम के नाम पर एक बड़ा धब्बा लगा है। अभिभावकों के बीच विद्यालय की सुरक्षा को लेकर शंका भी बढती जा रही है। अभिभावकों के बीच इस घटना को लेकर रोष है। वही सनबीम ग्रुप के कार्यक्रम से उप-मुख्यमंत्री ने खुद को अलग कर लिया है। इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले उप-मुख्यमंत्री ने अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया है। अब देखना होगा कि 50 साल का बुज़ुर्ग हो चला सनबीम ग्रुप इस घटना पर क्या कार्यवाही करता है?



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