चुनावी वायदों से सज रहा बाज़ार, आइये और करिए प्रचार

शाहीन बनारसी

उत्तर प्रदेश। चुनाव जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर हो रहा है किसी का चयन करना। चुनाव जम्हूरी तर्ज-ए-हुकुमत है। हमारा मुल्क हिन्दुस्तान जम्हूरी मुल्क यानी कि लोकतान्त्रिक देश है। यहाँ पर हर धर्म को मानने वाले लोग रहते है और सभी को अपनी इच्छानुसार मत देने का अधिकार प्राप्त है। हमारे लोकतंत्र के मुताबिक़, सभी नागरिको को यह छुट है कि वह अपनी मन पसंद नेता का चुनाव करे। चुनाव हमारे देश की एक निर्वाचन प्रक्रिया है और यह लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बिना इसके लोकतंत्र की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।

मतदान जनता का अधिकार है, जिसका उपयोग जनता सरकार चुनने के लिए करती है। मतदान का अधिकार देश के हर नागरिक को प्राप्त है। फिर चाहे वो किसी भी धर्म, जाति अथवा राज्य का हो। देश में रहने वाला हर नागरिक चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेता है और मतदान करता है। साथ ही ये उम्मीद भी करता है कि उसके मतों द्वारा एक सच्चे और इमानदार नेता का चयन हो। हमारे देश में वार्ड से लेकर संसद तक के चुनाव होते है। देश में होने वाले चुनाव के बहुमत का अधिकार हर नागरिक को 5 साल के अंतराल में मिलता है।

अब जब चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है और चुनावी बिगुल बज गया है तो यानि चुनाव सर पर है। सभी राजनैतिक दल जनता को लुभाने के लिए अपने अपने वायदे कर रहे है। कोई चाँद लाकर देना चाहता है तो किसी की फेहरिश्त में तारे भी है। कोई सूरज से मुकाबिल होने को तैयार है तो गर्त से सच को लाने का वायदा कर देता है। कोई स्कूटी दे रहा है तो कोई लैपटॉप, कोई टेबलेट दे रहा है तो कोई मुफ्त में बिजली। सब मिलाकर वायदे हर सु दिखाई पड़ रहे है। वायदे हर बार होते है और इस बार भी हो रहे है। जम्हूर खड़ा वायदों के बाज़ार में वायदों के मोल भाव कर रहा है।

जनता का दिल जीतने का अथक प्रयास जारी है। सिर्फ इसी बार ही नहीं बल्कि हर बार जब भी चुनाव का मौसम आता है सभी नेता जोरो शोरो से जनता को लुभाने का प्रयास करते है और कई वायदे करते है। वही जनता को रैलियां, रोड शो और चुनावी प्रचार के दौरान दिले भाषणों से लगता है कि ये नेता ठीक है, हम इसको ही मतदान करेंगे और नेताओ की भाषण से लगता है कि इस बार आने वाली सरकार से हमारे देश के हालात बदल जायेंगे और गरीब जनता सोचती है कि हमारी गरीबी मिट जाएगी। हमारे पास ये डेटा तो नही है कि गरीबी अब तक कितनी मिटी मगर वायदों के बाज़ार सज चुके है। जम्हूर इन वायदों में मोल भाव भी कर रहा है। मतों की ठेकेदारी करने वालो का भी जोड़ तोड़ जारी है। ये मोहल्ला हमारे इशारे पर वोट देता है कहने वाले भी चाय पान की दुकानों पर जम चुके है। आई इन चुनावों में देखते है वायदों का ऊंट किस करवट बैठता है।



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