ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण: जिला जज की अदालत ने अगली तारीख मुक़र्रर किया 14 अक्टूबर, आ सकता है कार्बन डेंटिंग की मांग पर उस दिन फैसला, जाने क्या रही आज दोनों पक्ष की दलील

शाहीन बनारसी

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद प्रकारण में आज जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई। आज हुई सुनवाई के दरमियान अंजुमन मसाजिद इन्तेज़ामियां कमेटी के तरफ से दलील पेश किया गया। वही इस दलील के प्रति उत्तर में कार्बन डेंटिंग की मांग कर रही 4 वादिनी मुकदमा के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के द्वारा दलील पेश हुई। जबकि एक अन्य वादिनी मुकदमा राखी सिंह के अधिवक्ता मान बहादुर सिंह ने किसी भी दलील को पेश करने से इंकार कर दिया है।

गौरतलब हो कि वादिनी मुकदमा समस्त 5 महिलाओं के बीच आपसी विवाद खुल कर सामने आ चूका है। 4 वादिनी मुकदमा के तरफ से दलील अदालत में पेश कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सर्वे के दरमियान मिली आकृति जिसको वादिनी मुकदमा और उनके पैरोकार द्वारा शिवलिंग होने का दावा किया गया है जबकि मस्जिद कमेटी का दावा है कि उक्त आकृति शिवलिंग नही बल्कि एक फव्वारा है के कार्बन डेंटिंग की मांग किया है। जबकि एक अन्य वादिनी मुकदमा राखी सिंह के द्वारा इस कार्बन डेटिंग की मांग का विरोध किया गया है और कहा गया है कि इससे शिवलिंग खंडित हो जायेगा। आज पेश हुई दलीलों के बाद अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 14 अक्तूबर मुकरर्र किया है।

आज अदालत में मस्जिद कमेटी के जानिब से पेश हुवे अधिवक्ता मुमताज़ अहमद और एखलाक अहमद ने दलील पेश करते हुवे कहा कि 16 मई को सर्वे के दौरान मिली आकृति के बाबत दी गई आपत्ति का निस्तारण नहीं किया गया और मुकदमा सिर्फ शृंगार गौरी के पूजा और दर्शन के लिए दाखिल किया गया है।  जिसके बाद 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मिली आकृति को सुरक्षित व संरक्षित करने का आदेश दिया है। वैज्ञानिक जांच में केमिकल के प्रयोग से आकृति का क्षरण सम्भव है।

मुमताज़ अहमद ने दलील पेश करते हुवे कहा कि कार्बन डेटिंग जीव व जन्तु की होती है, पत्थर की नहीं हो सकती। क्योंकि पत्थर कार्बन को एडाप्ट नहीं कर सकता। यह कार्बन डेटिंग महज़ वाद की मजबूती व साक्ष्य संकलित करने के लिए कराई जा रही है ऐसे में कार्बन डेटिंग का आवेदन खारिज होने योग्य है। इसके जवाब में वादिनी मुकदमा 4 महिलाओं के जानिब से पेश हुवे अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन, सुभाष नन्दन चतुर्वेदी व सुधीर त्रिपाठी ने दलील पेश किया। दलील पेश करते हुवे अधिवक्ताओं ने कहा कि वाद में दृश्य व अदृश्य देवता की बात कही गई है। सर्वे के दौरान वजू स्थल स्थित हौज से पानी हटाने पर अदृश्य आकृति दृश्य रूप में दिखी। ऐसे में दावे का हिस्सा है, बरामद आकृति शिवलिंग है या फव्वारा यह वैज्ञानिक जांच से ही स्पष्ट होगा। ऐसे में आकृति को बिना नुकसान पहुंचाए, हिदुओं की आस्था को चोट पहुंचाए बगैर वैज्ञानिक जांच भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के विशेषज्ञ टीम से कराई जाए ताकि यह तय हो सके कि आकृति शिवलिंग है या फव्वारा।

वही इन सभी दलीलों के बीच अदालत में मौजूद वादिनी राखी सिंह के अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने प्रतिउत्तर में दलील देने से इंकार कर दिया और अदालत ने दोनों पक्षो को सुनने के बाद 14 अक्तूबर की तारीख मुक़र्रर किया है।  आदेश 1 नियम 10 के तहत प्रभावित 8 पक्षकारों की तरफ से दिए गए आवेदन और मुख्तार अहमद की तरफ से जरूरी पक्षकार बनने के आवेदन पर उसी दिन सुनवाई किये जाने की बात कही।

वही दूसरी तरफ ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दरमियान मिली आकृति को शिवलिंग होने का दावा करते हुवे इसकी पूजा पाठ का अधिकार मांगने वाली याचिका पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी। यह सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र कुमार पांडेय की अदालत में जारी है।

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