लो ई का भइया, बनारस व्यापार मंडल में एक और खरमंडल, बहुचर्चित समाजसेविका नर्गिस बेगम ने सब रजिस्ट्रार सहित मुख्यमंत्री को पत्र लिख “बनारस व्यापार मंडल” के संदर्भ में उठाये गम्भीर सवाल

शाहीन बनारसी/ईदुल अमीन

वाराणसी: कालातीत संस्था बनारस व्यापार मंडल का खूब हो हल्ला के साथ बीते अगस्त माह में नियमो के विरुद्ध असंवैधानिक रूप से चुनाव तो हो गया। मगर कहते है ताज मिलते ही मुसीबते भी मिलने लगी। अभी चुनाव संपन्न ही हुआ था कि बनारस व्यापार मंडल के असली महामंत्री मो0 असलम ने आपत्ति दाखिल करते हुवे अपनी कालातीत संस्था को डिजाल्व करने का प्रत्यावेदन सब रजिस्ट्रार को दे दिया। इसके बाद कई अन्य संस्थापक सदस्यों ने भी संस्था को डिजाल्व करने का अनुरोध कर दिया था।

सब मिला कर बनारस व्यापार मंडल में ज़बरदस्त खरमंडल हो गया। पूरा चुनाव और चुनाव का तरीका ही इस संस्था के बाईलाज के अनुसार संदेह के घेरे में आ गया। इसके बाद असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। जहा एक तरफ संस्था के रिनिवल की पेच अभी फंसी ही थी कि इसी बीच इस कालातीत संगठन के द्वारा कुछ अन्य पदाधिकारी मनोनीत कर कथित रूप से उनको मनोनयन पत्र दिया गया जिसके ऊपर कोई रजिस्ट्रेशन नम्बर नही लिखा था। इसका संज्ञान आने के बाद इस कालातीत संस्था के महामंत्री मो0 असलम ने अदालत का रुख जहा कर रखा है वही शासन और प्रशासन को पत्र लिख कर इस सम्बन्ध में अवगत भी करवा दिया गया है।

इन सबके बीच आज एक बड़ा खरमंडल बहुचर्चित समाजसेविका और कांग्रेस नेत्री नर्गिस बेगम ने कर दिया। नर्गिस बेगम ने एक पत्र लिखा कर सब रजिस्ट्रार को इस नियुक्ति पत्र की प्रति संलग्नक करते हुवे अवगत करवाया है कि जब यह संस्था कालातीत है तो फिर इस संस्था में रेवड़ी की तरह पद कैसे बाटे जा रहे है। नर्गिस बेगम ने इस पत्र की प्रति मुख्यमंत्री, गृह सचिव, वित्त मंत्री, निबंधक, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त और पुलिस आयुक्त को प्रेषित करते हुवे सब रजिस्ट्रार को अवगत करवाते हुवे आरोप लगाया है कि क्षेत्र के कतिपय दुकानदारो से चंदा लेकर संस्था के रिनिवल को नियम विरुद्ध करवाने के लिए “सुविधा शुल्क” देने की बात कही जा रही है। जबकि संस्था कालातीत है और इस संस्था के महामंत्री और सस्थापक सदस्यों में एक तिहाई से अधिक बहुमत के साथ लोग संस्था को डिजाल्व करने का प्रत्यावेदन कर चुके है।

नर्गिस बेगम ने साथ ही अपने पत्र में लिखा है कि इस संस्था को वर्ष 1981 का दर्शा कर लोगो को भ्रमित किया जा रहा है जबकि जिन संस्थाओं से इसको सम्बद्ध बताया जा रहा है उससे यह सम्बद्ध है ही नही। वही नर्गिस बेगम ने सुचना के अधिकार के तहत कुल 5 गम्भीर विषयों पर सुचना मांगी गई है। इस सम्बन्ध में नर्गिस बेगम ने हमसे बात करते हुवे कहा कि समाज के प्रति अपने दायित्वों की पूर्ति करते हुवे मैं इस काम को कर रही हु। बेनिया बाग़ में पटाखा मार्किट लगाने के एक भ्रम जाल को फैला कर कतिपय लोगो के द्वारा काफी लोगो का आर्थिक नुक्सान महज़ अपने स्वार्थ हेतु किया गया है। खुद मुझको तीन नम्बर की दूकान देने की बात आज भी मेरे पास काल रेकार्डिंग में उपलब्ध है। दूकान मिलना छोड़े कतिपय लोगो ने अपनी मुनाफे की रोटी सकने के लिए नुक्सान करवा दिया। मैं किसी अन्य के साथ ऐसा नही होने दूंगी।

नर्गिस बेगम ने कहा कि कुछ लोग क्षेत्र के मठाधीश बनने के लिए और अपना सियासी कद बढाने के लिए लोगो को गुमराह कर रहे है। ऐसी ही गुम्राहियत में डाल कर प्रशासन का भी इस्तेमाल किया गया और ऐसा हो हल्ला करके असंवैधानिक चुनाव करवाया गया जैसे लग रहा था कि किसी सांसद का चुनाव हो रहा हो। जबकि हकीकत ये है कि अपनी सियासी ज़मींन बनाने के लिए आम दुकानदारो और प्रशासन को परेशांन कर असंवैधानिक चुनाव करवाया गया। ऐसे लोगो को बेनकाब करने का वक्त अब आ चूका है। हमने इस सम्बन्ध में अदालत का भी दरवाज़ा खटखटाने का फैसला लिया है और जल्द ही हमारे अधिवक्ता इस पर कानूनी कार्यवाही हेतु अदालत में अर्जी देंगे।

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