ज्ञानवापी मस्जिद में वज़ू के लिए हो रही दिक्कतो को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जिलाधिकारी को बैठक करने का दिया हुक्म, शुक्रवार को होगी मामले में अगली सुनवाई

आदिल अहमद

डेस्क: ज्ञानवापी मस्जिद में नमाजियों को वुजू में हो रही दिक्कत के मामले में दाखिल अंजुमन मसाजिद इन्तेज़मियां कमेटी की याचिका पर आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने वुजू और इस्तिनजाख्वाना की मस्जिद में व्यवस्था करने की मांग पर जिला अधिकारी को बैठक करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने वाराणसी के कलेक्टर को 18 अप्रैल यानी मंगलवार को बैठक बुलाकर दिक्कत का हल निकालने के लिए कहा है। साथ ही कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के लिए मामले को लिस्ट कर दिया है। अदालत इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगी। बताते चले कि इस शुक्रवार जमात-उल-विदा की नमाज़ मुस्लिम समुदाय अदा करेगा साथ ही शनिवार को ईद होने की सम्भावना है। जिस दिन मस्जिद में नमाजियों की भारी ताय्दात रहती है।

अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद कमिटी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट हुजैफा अहमदी ने कहा कि मस्जिद का वजूखाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंद है क्योंकि वुजू उस जगह पर है जहां शिवलिंग पाए जाने का दावा किया गया था। उस जगह को सुप्रीम कोर्ट ने सील करने का आदेश दिया था। वुजू की व्यवस्था एक ड्रम में पानी रख कर की गई है। रमजान के दौरान नमाजियों की अधिक संख्या के चलते समस्या आ रही है। अहमदी ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ये स्पष्ट था कि सील करने का निर्देश मुसलमानों के धार्मिक अधिकार को प्रतिबंधित नहीं करेगा। इसमें वुज़ू शामिल है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वुजू के लिए पानी उपलब्ध कराने की मौजूदा व्यवस्था है। शौचालय के संबंध में मेहता ने कहा कि एंट्री एक तरफ से है इसलिए दिक्कत हो सकती है। अहमदी ने कहा कि फिलहाल के लिए मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था कर दी जाए। इस पर मेहता ने कहा कि मोबाइल टॉयलेट पर अधिकारियों को निर्णय लेना होगा। ध्यान रखना होगा कि इससे कहीं परिसर की पवित्रता न प्रभावित हो। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी और बैठक बुलाकर दिक्कत का हल निकालने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

बताते चले कि पिछले साल मई में निचली अदालत के आदेश पर हुए मस्जिद के सर्वे में वजूखाने में शिवलिंग जैसी रचना मिली थी। मस्जिद कमिटी ने उसे फव्वारा बताया था, लेकिन हिंदू पक्ष ने उसे औरंगजेब के आदेश पर तोड़े गए काशी विश्वनाथ मंदिर का मूल शिवलिंग बताया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी जगह को संरक्षित रखने के लिए सील करने का आदेश दिया था।

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