ट्रंप की ‘सैन्य संघर्ष रोकने’ की टिप्पणी पर राहुल गांधी का पलटवार: क्या यह भारत की संप्रभुता पर सवाल?

आफताब फारुकी

PNN24 News, नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। हाल ही में ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़े सैन्य संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। ट्रंप के इस बयान के बाद से ही भारतीय राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है, और इस पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तरफ से आई है।

बताते चले कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में कहा, ‘मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच एक बहुत बड़े सैन्य संघर्ष को रोका। वे युद्ध करने वाले थे और यह एक बहुत बुरा युद्ध होता। यह बहुत, बहुत भयानक होता।’ ट्रंप के इस दावे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब भारत लगातार यह कहता रहा है कि वह अपने आंतरिक और क्षेत्रीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता।

इसी पर राहुल गांधी ने तुरंत पलटवार करते हुए अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका, भारत की संप्रभुता पर गंभीर सवाल उठाता है। क्या भारत सरकार इस पर स्पष्टीकरण देगी? क्या वाकई ऐसा कोई हस्तक्षेप हुआ था जिसके बारे में देश को पता नहीं है?’ राहुल गांधी की यह प्रतिक्रिया सीधे तौर पर केंद्र सरकार, खासकर विदेश मंत्रालय से, इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करती है।

विपक्ष का मानना है कि यदि ट्रंप का दावा सत्य है, तो यह भारत की विदेश नीति और संप्रभुता के सिद्धांतों के विपरीत है। भारत का हमेशा से यह रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर सहित भारत-पाकिस्तान संबंध द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। ऐसे में, यदि किसी अमेरिकी हस्तक्षेप से कोई बड़ा सैन्य संघर्ष रुका होता, तो यह देश की जनता और संसद से छिपाना एक गंभीर मुद्दा बन सकता है। विपक्षी दल इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि यह बयान भारत की वैश्विक स्थिति और आत्मनिर्भरता के दावों पर सवालिया निशान लगाता है।

फिलहाल, भारत सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि सरकार शायद इस बयान को ज्यादा तूल न देना चाहे, ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों में किसी तरह की अनावश्यक खटास न आए। हालांकि, विपक्ष के लगातार बढ़ते दबाव के चलते सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है। यह मामला न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि भारत-पाकिस्तान के संवेदनशील रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की सीमा को भी एक बार फिर बहस के केंद्र में ले आया है। राहुल गांधी की यह टिप्पणी निश्चित तौर पर आने वाले दिनों में और राजनीतिक गरमाहट पैदा करेगी।

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