दिल्ली में ‘सिग्मा गैंग’ का खात्मा…! रोहिणी एनकाउंटर में बिहार के 4 मोस्ट वांटेड गैंगस्टर ढेर, चुनावों में बड़ी साजिश रचने का था शक

आफताब फारुकी
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में देर रात हुई एक भीषण मुठभेड़ (एनकाउंटर) में बिहार के चार कुख्यात अपराधी मारे गए हैं। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (स्पेशल सेल) और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने मिलकर की, जिसे संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

बुधवार और गुरुवार की मध्यरात्रि को, दिल्ली के रोहिणी स्थित बहादुर शाह मार्ग पर पुलिस और बदमाशों के बीच जमकर गोलीबारी हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि बिहार का कुख्यात ‘सिग्मा गैंग’ का सरगना अपने साथियों के साथ दिल्ली में छिपा हुआ है और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है।
पुलिस ने जैसे ही इन संदिग्धों को घेरने की कोशिश की, बदमाशों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोलियां भी चलीं, जिसमें चारों अपराधी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत डॉ. बीएसए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मारे गए वांटेड अपराधी कौन थे?
एनकाउंटर में मारे गए सभी चार अपराधी बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले थे और बिहार पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल थे। उनकी पहचान इस प्रकार है:
- रंजन पाठक (25): कुख्यात ‘सिग्मा गैंग’ का सरगना।
- बिमलेश महतो उर्फ बिमलेश साहनी (25)
- मनीष पाठक (33)
- अमन ठाकुर (21) (दिल्ली के करावल नगर का निवासी बताया जा रहा है)
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ये सभी अपराधी बिहार में हत्या, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट सहित कई संगीन मामलों में वांछित थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार दिल्ली और नेपाल के बीच ठिकाने बदल रहे थे।
बिहार चुनावों में दहशत फैलाने की थी साजिश
पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई है कि यह कुख्यात गिरोह आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य में हिंसा और दहशत फैलाने की बड़ी साजिश रच रहा था। बिहार पुलिस को इस संबंध में कुछ ऑडियो कॉल भी मिले थे, जिससे इस गैंग के नापाक मंसूबों का खुलासा हुआ। समय रहते दिल्ली और बिहार पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन ने इस बड़ी आपराधिक योजना को विफल कर दिया।
मुठभेड़ के दौरान दो से तीन पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन डीसीपी संजीव यादव के नेतृत्व में चलाया गया, और यह सफलता दिखाता है कि कानून तोड़ने वाले अपराधी कहीं भी क्यों न छिपे हों, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं।











