इंटरनेशनल कोर्ट ने इज़रायल को दिया सख्त संदेश: “गाज़ा में मानवीय सहायता पहुंचाना आपकी ज़िम्मेदारी!”

ईदुल अमीन

हेग/यरूशलम: गाज़ा पट्टी में जारी युद्ध के बीच, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice – ICJ) ने इज़रायल को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि गाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना इज़रायल की कानूनी ज़िम्मेदारी है।

ICJ ने अपने नवीनतम सलाहकार राय (Advisory Opinion) में इस बात पर जोर दिया कि एक ‘कब्ज़े वाली शक्ति’ (Occupying Power) के रूप में इज़रायल बाध्य है कि वह गाज़ा की नागरिक आबादी को भोजन, पानी, आश्रय और चिकित्सा सहित जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी ज़रूरतें सुनिश्चित करे।

कोर्ट की दो टूक: सहायता रोकने का कोई अधिकार नहीं

कोर्ट ने विशेष रूप से इज़रायल द्वारा मानवीय सहायता संगठनों, खासकर फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) के काम में बाधा डालने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

मूल कर्तव्य: कोर्ट ने कहा कि इज़रायल अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) के तहत आवश्यक राहत योजनाओं को सुविधाजनक बनाने के लिए बाध्य है।

भूख को हथियार बनाना: सबसे गंभीर टिप्पणी में, ICJ ने कहा कि इज़रायल एक कब्ज़े वाली शक्ति होने के नाते, भूख को युद्ध की एक विधि (Method of Warfare) के रूप में उपयोग नहीं कर सकता है। यह टिप्पणी उन आरोपों के बीच आई है कि इज़रायल ने कई महीनों तक संयुक्त राष्ट्र की सहायता को अवरुद्ध रखा था।

वितरण की भी ज़िम्मेदारी: कोर्ट ने कहा कि इज़रायल को न केवल आवश्यक वस्तुओं के प्रवेश की अनुमति देनी होगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन वस्तुओं का वितरण नियमित, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से हो।

इज़रायल ने किया फैसले को खारिज, मगर नैतिक दबाव बढ़ा

हालांकि ICJ की यह सलाहकार राय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका ‘महान कानूनी और नैतिक महत्व’ होता है। इस फैसले पर इज़रायली विदेश मंत्रालय ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट के निष्कर्षों को श्रेयस्कर रूप से खारिज कर दिया है। इज़रायल ने दोहराया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पूरी तरह से पालन करता है, और गाज़ा में बिगड़ते हालात के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया।

लेकिन अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि इस फैसले ने इज़रायल पर भारी नैतिक और राजनयिक दबाव बढ़ा दिया है। अब संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस फैसले का हवाला देते हुए गाज़ा में मानवीय संकट को कम करने के लिए इज़रायल पर और अधिक सख्ती से दबाव डाल सकते हैं।

गाज़ा का हाल: पिछले कई महीनों से, गाज़ा की आबादी भीषण मानवीय संकट का सामना कर रही है। भोजन, साफ पानी और चिकित्सा आपूर्ति की भारी कमी है, और संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार अकाल जैसी स्थिति की चेतावनी दी है। ICJ का यह फैसला संकटग्रस्त गाज़ा के लोगों के लिए ‘उम्मीद की एक किरण’ बनकर आया है, यह देखना बाकी है कि इज़रायल इस पर किस हद तक अमल करता है।

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