PNN24 News विशेष: त्यौहारों की चमक पर ‘चांदी की किल्लत’ का साया! रिकॉर्ड क़ीमतों पर भी नहीं मिल रही है सिल्वर

ईदुल अमीन

नई दिल्ली: देश में त्योहारों का सीज़न शुरू हो चुका है, और इस दौरान सोने-चांदी की ख़रीददारी को शुभ माना जाता है। लेकिन इस साल भारतीय सर्राफ़ा बाज़ार एक अजीब सी चुनौती का सामना कर रहे हैं—बाज़ार में चांदी (Silver) की भारी किल्लत है, जिसने इस फ़ेस्टिवल सीज़न की चमक को फीका कर दिया है। रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच चुकी क़ीमतों के बावजूद, लोग चांदी ख़रीदने को तैयार हैं, लेकिन कई बड़े और छोटे ज्वैलर्स के पास स्टॉक लगभग ख़त्म हो चुका है।

क्या कह रहे हैं बाज़ार के आँकड़े?

इंडियन बुलियन ज्वैलर्स असोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के मुताबिक़, 14 अक्टूबर को चांदी का भाव रुपये 1,78,100 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड हाई स्तर पर था। यह वो क़ीमत है जो आमतौर पर ग्राहकों को ख़रीददारी से दूर रखती है, लेकिन इस बार मामला अलग है। वाराणसी के एक जाने-माने ज्वैलर ने नाम न छापने की इल्तेजा के साथ PNN24 News से बात करते हुए कहा “इस दाम पर तो ग्राहक आमतौर पर हाथ खींच लेते हैं, लेकिन इस बार लोग निवेश के लिए भी और त्योहारों के लिए भी चाँदी ख़रीदना चाहते हैं। पर हम क्या करें, स्टॉक ही नहीं है! जो पुरानी चाँदी पिघलकर आती थी, वो भी बहुत कम हो गई है।”

किल्लत की मुख्य वजह क्या है?

बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इस शॉर्टेज के पीछे की मुख्य वजह चांदी की लगातार और अप्रत्याशित रूप से बढ़ती क़ीमतें हैं।

  1. तेज़ क़ीमत वृद्धि: चांदी की क़ीमतें इतनी तेज़ी से बढ़ी हैं कि बड़े होलसेलर्स और डीलर्स ने अपना स्टॉक रोक लिया है। उन्हें लगता है कि क़ीमतें और ऊपर जाएँगी, इसलिए वे इस उम्मीद में माल नहीं बेच रहे हैं कि उन्हें और ज़्यादा मुनाफ़ा मिलेगा।
  2. आयात (Import) में कमी: अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी क़ीमतों की अस्थिरता (volatility) के कारण आयात सीमित हो गया है। ज़्यादा दाम होने की वजह से व्यापारी बड़े ऑर्डर देने से बच रहे हैं।
  3. पुरानी चाँदी की आवक बंद: चूंकि क़ीमतें बहुत ऊँची हैं, लोग अपनी पुरानी चांदी या बेकार हो चुकी चीज़ों को भी अब पिघलाने या बेचने नहीं ला रहे हैं। वे भी क़ीमतों के और बढ़ने का इंतज़ार कर रहे हैं। इस कारण, बाज़ार में रीसाइक्लिंग (Recycling) से मिलने वाला स्टॉक भी लगभग बंद हो गया है।

ग्राहकों की मजबूरी

त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या आभूषण ख़रीदना परंपरा का हिस्सा है। ग्राहकों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। दिल्ली के चांदनी चौक बाज़ार में ख़रीददारी करने आईं सुनीता वर्मा कहती हैं, “मुझे दिवाली के लिए चांदी के कुछ सिक्के और पूजा के बर्तन लेने थे, लेकिन एक दुकान पर तो क़ीमत रिकॉर्ड तोड़ है, और दूसरी पर माल ही नहीं है। मजबूरी में लोग अब छोटे ग्राम (gram) के गहने या महँगी क़ीमत पर ही ख़रीददारी कर रहे हैं।”

ज्वैलर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने PNN24 News को बताया कि जब तक होलसेलर अपना स्टॉक रिलीज़ नहीं करेंगे या अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार से बड़ी खेप नहीं आएगी, यह किल्लत बनी रहेगी। बहरहाल, इस फ़ेस्टिव सीज़न में भारतीय बाज़ार एक अनोखी स्थिति का गवाह बन रहे हैं, जहाँ रिकॉर्ड दाम पर भी ग्राहक ख़रीददारी को तैयार है, लेकिन बाज़ार के पास उन्हें देने के लिए पर्याप्त ‘सफेद सोना’ (चाँदी) मौजूद नहीं है।

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