अंतर्राष्ट्रीय हंगामा: ‘ब्राज़ीलियाई मॉडल’ ने कहा- “ये क्या पागलपन है? मैं तो नमस्ते जानती हूँ!”

ईदुल अमीन
नई दिल्ली/साओ पाउलो: राहुल गांधी ने ‘चुनाव चोरी’ के आरोपों को बल देने के लिए जिस ब्राज़ीलियाई मॉडल की तस्वीर का इस्तेमाल किया और दावा किया कि उसकी फोटो हरियाणा की मतदाता सूची में 22 बार इस्तेमाल हुई, उस महिला ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया दी है। इस प्रतिक्रिया ने इस पूरे राजनीतिक विवाद को एक नया और हास्यास्पद मोड़ दे दिया है।
मॉडल हुई हैरान, पूछा- “क्या मैं भारतीय दिखती हूँ?”
वह महिला जिसकी तस्वीर दिखाई गई थी, अब उसकी पहचान लारिसा नेरी के रूप में हुई है, जो ब्राजील में एक डिजिटल इन्फ्लुएंसर और हेयरड्रेसर हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आश्चर्य व्यक्त किया है:
“दोस्तों, मैं आपको एक मज़ाक बताने जा रही हूँ। वे मेरी एक पुरानी तस्वीर का उपयोग कर रहे हैं… और भारत में! वे मुझे भारतीय बताकर लोगों को ठग रहे हैं। यह क्या पागलपन है! यह कितनी अजीब बात है! क्या आप सोचते हैं कि मैं भारतीय दिखती हूँ? मुझे तो लगता है कि मैं मेक्सिकन दिखती हूँ।”
लारिसा ने स्पष्ट किया कि उनकी यह तस्वीर उनके मॉडलिंग के शुरुआती दिनों की एक ‘स्टॉक फोटो’ थी, जिसे एक दोस्त के लिए खिंचवाया गया था और इसका इस्तेमाल एक स्टॉक इमेज वेबसाइट पर किया गया था।
- राजनीति से इंकार: उन्होंने साफ कहा कि उनका भारत की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और वह कभी भारत नहीं आईं।
- नमस्ते! उन्होंने मज़ाक में कहा कि वह अब भारत में प्रसिद्ध हो गई हैं और उन्हें अब कुछ भारतीय शब्द सीखने होंगे। उन्होंने कहा, “मैं तो सिर्फ नमस्ते जानती हूँ।”
‘स्टॉक इमेज’ विवाद और फोटोग्राफर का पक्ष
इस पूरे मामले में एक और परत तब जुड़ी जब पता चला कि वह तस्वीर एक ‘फ्री स्टॉक इमेज’ थी, जिसे ब्राज़ीलियाई फोटोग्राफर मैथ्यूस फेरेरो ने खींचा था।
- फेरेरो ने सफाई दी है कि उनकी तस्वीर को गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। उन्होंने भारतीय मीडिया से लगातार संदेश मिलने के बाद अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स भी डिलीट कर दिए।
- अधिकारों का उल्लंघन: राहुल गांधी का आरोप है कि इस स्टॉक इमेज का इस्तेमाल सुनियोजित तरीके से किया गया, जबकि बीजेपी और चुनाव आयोग का मानना है कि यह प्रशासनिक या लिपिकीय त्रुटि का मामला है, जिसका राजनीतिकरण किया जा रहा है।
लारिसा नेरी के इस स्पष्टीकरण ने राहुल गांधी के आरोपों की ‘अंतर्राष्ट्रीय सबूत’ वाली धार को कुछ हद तक कुंद कर दिया है, जिससे यह पूरा मुद्दा अब तथ्यात्मक त्रुटि बनाम केंद्रीय साजिश की बहस में उलझ गया है।











