दालमंडी पर सियासत गर्म: कांग्रेस और व्यापारी दल ने DM से की मुलाकात, कहा- ‘उत्पीड़न बंद हो, पुनर्वास मिले’

ईदुल अमीन
PNN24 न्यूज़, वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दालमंडी चौड़ीकरण को लेकर चल रहे विवाद और तनाव ने अब सियासी रूप ले लिया है। दालमंडी के व्यापारियों और क्षेत्रवासियों के कथित उत्पीड़न को लेकर दालमंडी व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल ने साफ मांग की है कि प्रशासन को तुरंत उत्पीड़न बंद करना चाहिए और व्यापारियों के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशना चाहिए।
क्या है प्रतिनिधिमंडल की मुख्य मांग?
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान दालमंडी क्षेत्र के निवासियों और खासकर छोटे दुकानदारों की पीड़ा को प्रमुखता से रखा।
- उत्पीड़न बंद हो: कांग्रेस नेताओं और व्यापार मंडल ने आरोप लगाया कि चौड़ीकरण के नाम पर लल्लापुरा चौकी इंचार्ज (जैसा कि हाल की खबरों में आरोप लगे थे) और अन्य पुलिसकर्मी दुकानदारों और निवासियों को थाने पर बुलाकर धमका रहे हैं और उन पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से इस उत्पीड़न को तत्काल रोकने की मांग की।
- वैकल्पिक रास्ता: उनकी प्राथमिक मांग है कि दालमंडी चौड़ीकरण के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग (Alternative Route) तलाश किया जाए, जिससे कम से कम लोगों के घर और दुकान प्रभावित हों।
- मुआवजा और पुनर्वास: प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा कि अगर चौड़ीकरण आवश्यक है, तो भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ही जगह ली जाए और मकान मालिकों के साथ-साथ दुकानदारों को भी उचित मुआवजा दिया जाए और उनका पुनर्वास किया जाए।
10-30 लाख की ‘पगड़ी’ फूंकने वालों का क्या कसूर?
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी और मानवीय समस्या उन हजारों दुकानदारों की है जो इन प्रभावित होने वाले भवनों में किरायेदार हैं।
- पगड़ी का दर्द: इन दुकानदारों ने सालों पहले मोटी रकम (कई मामलों में ₹10 लाख से अधिक) बतौर ‘पगड़ी’ (Goodwill) देकर दुकान किराए पर ली थी।
- अंधेरा भविष्य: चूंकि भूमि अधिग्रहण कानून में ‘पगड़ी’ या किरायेदार के लिए अलग से मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इन दुकानदारों को कुछ भी नहीं मिल रहा है। उनकी दुकान और उनकी पूंजी (पगड़ी) दोनों खत्म हो गई हैं।
प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता राघवेन्द्र चौबे, दालमंडी व्यापार मंडल के शाहनवाज़ शानू और अज़हर आलम ‘अज्जू’ आदि शामिल रहे।
आगे क्या? प्रशासन पर बढ़ा दबाव
दालमंडी के छोटे व्यापारियों और क्षेत्रवासियों का यह दर्द अब जमीनी हकीकत बन चुका है। कांग्रेस और व्यापार मंडल के इस संयुक्त प्रयास ने जिलाधिकारी पर बड़ा दबाव बना दिया है।
अब देखना यह होगा कि क्या वाराणसी प्रशासन केवल मकान मालिकों को मुआवजा देकर पल्ला झाड़ लेगा, या मानवीय आधार पर उन हजारों छोटे दुकानदारों के लिए कोई विशेष पुनर्वास योजना या अंतरिम मुआवजा सुनिश्चित करता है, जिनकी जिंदगी भर की पूंजी ‘पगड़ी’ के नाम पर डूब चुकी है।











