चौड़ा हुआ दालमंडी चौडीकरण का मुद्दा…! APCR की शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने DM को जारी किया नोटिस, प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें, दालमंडी के प्रभावित दुकानदारो और भवन स्वामियों में जागी ‘उम्मीद की एक किरण’

तारिक आज़मी
PNN24 न्यूज़, वाराणसी। वाराणसी में दालमंडी चौड़ीकरण का मामला अब मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) तक पहुँच गया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) नामक संगठन ने इस मामले में मानवाधिकार आयोग में एक याचिका दायर की है, जिसके बाद आयोग ने वाराणसी के जिलाधिकारी (DM) को नोटिस जारी कर दिया है। इस नोटिस के चलते अब जिलाधिकारी को इस गंभीर शिकायत का विस्तार से जवाब देना होगा।
क्या है मानवाधिकार आयोग में शिकायत?
APCR ने अपनी शिकायत में सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि दालमंडी चौड़ीकरण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में स्थानीय निवासियों और दुकानदारों के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हो रहा है।
- रोजी-रोटी का अधिकार: शिकायत का मुख्य बिंदु उन हजारों छोटे दुकानदारों की दुर्दशा है, जिनकी दुकानें चौड़ीकरण की ज़द में आ रही हैं। इन दुकानदारों ने सालों पहले दुकान किराए पर लेने के लिए मोटी रकम ‘पगड़ी’ (Goodwill) के तौर पर दी थी।
- मुआवजे का शून्य: शिकायत में कहा गया है कि मकान मालिकों को तो मुआवजा मिल रहा है, लेकिन जिन किरायेदारों ने अपनी जीवन भर की पूंजी ‘पगड़ी’ में लगा दी, उन्हें कुछ भी नहीं मिल रहा है। यह सीधे तौर पर उनके रोजी-रोटी के अधिकार का उल्लंघन है।
- उत्पीड़न के आरोप: याचिका में यह भी कहा गया है कि चौड़ीकरण का विरोध करने वाले लोगों को प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
DM को क्यों जारी हुआ नोटिस?
मानवाधिकार आयोग ने APCR की याचिका को गंभीरता से लिया है। आयोग का मानना है कि यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय गरिमा के खिलाफ है।
- जवाबदेही: नोटिस जारी होने का मतलब है कि जिलाधिकारी को एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर आयोग को विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। उन्हें बताना होगा कि चौड़ीकरण की प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण कानून और पुनर्वास नियमों का किस प्रकार पालन किया जा रहा है, और किरायेदारों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
बढ़ गई वाराणसी प्रशासन की मुश्किलें
यह नोटिस वाराणसी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब तक, यह मामला केवल स्थानीय विरोध और राजनीतिक दबाव तक सीमित था, लेकिन अब यह संवैधानिक और कानूनी दायरे में आ गया है। मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित कर सकता है कि चौड़ीकरण की इस बड़ी परियोजना में विकास के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। दालमंडी के हजारों छोटे दुकानदारों के लिए यह एक बड़ी उम्मीद है कि शायद मानवाधिकार आयोग ही उनकी डूबी हुई पूंजी और उजड़े भविष्य का हिसाब मांग पाए।











