अनोखी मिसाल: हिंदू-मुस्लिम सौहार्द की जीत….! घर टूटने पर सामाजिक कार्यकर्ता ने पत्रकार को दान कर दी अपनी ज़मीन

आफताब फारुकी
PNN24 न्यूज़ डेस्क: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू में, जो अक्सर सांप्रदायिक तनाव का केंद्र और भाजपा का गढ़ माना जाता है, वहाँ के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने हिंदू-मुस्लिम एकता की एक अद्वितीय और मार्मिक मिसाल पेश की है। ज्वेल इलाके के निवासी कुलदीप शर्मा ने हाल ही में घर ढहाए गए स्थानीय पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डैंग को अपनी निजी ज़मीन दान कर दी है। ज़मीन के कागज़ात सौंपते समय कुलदीप शर्मा की आँखें नम हो गईं और उन्होंने जम्मू में भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लिया।
‘आपके लिए घर बनाऊंगा, चाहे भीख मांगनी पड़े’
पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डैंग का घर हाल ही में अधिकारियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। इस दुःख की घड़ी में कुलदीप शर्मा उनके लिए मसीहा बनकर सामने आए।
- भावुक आश्वासन: ज़मीन के कागजात सौंपते हुए शर्मा ने डैंग से कहा, “मैं आपके लिए घर ज़रूर बनाऊगा, चाहे मुझे पैसों के लिए भीख क्यों न मांगनी पड़े। हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ खड़ा करने की साज़िश कभी कामयाब नहीं होगी। हमारा भाईचारा हमेशा कायम रहेगा। आप एक अच्छे इंसान हैं। आपके बच्चे तरक्की करें।”
- सरकार पर सवाल: चन्नी इलाके में डैंग के खंडहर हो चुके घर के पास लगे अस्थायी तिरपाल के घर की ओर इशारा करते हुए शर्मा ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “देखिए, उनके बच्चे खुले में बैठे हैं। सरकार को शर्म आनी चाहिए। इस देश के नागरिक होने के बावजूद लोगों को बेघर किया जा रहा है।”
चुनिंदा कार्रवाई के आरोप और विवाद
पत्रकार अरफ़ाज़ अहमद डैंग का घर ध्वस्त किया जाना विवादों में घिर गया है।
- रिपोर्टिंग से कनेक्शन: डैंग का घर तब तोड़ा गया, जब कुछ दिन पहले ही उन्होंने एक बड़े ड्रग तस्करी रैकेट में गिरफ्तार संदिग्धों को एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) से जोड़ने की कोशिश की थी। यह पुलिस अधिकारी (जिनका तबादला 26 अक्टूबर को हुआ था) पहले जम्मू (पूर्व) के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी के पद पर तैनात थे।
- प्रशासन का खंडन: हालांकि, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पत्रकार को चुनिंदा तौर पर निशाना बनाए जाने के आरोपों का खंडन किया है और तर्क दिया है कि यह घर सरकार की ज़मीन पर अवैध रूप से बना था। जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने ड्रग्स की बरामदगी पर डैंग की रिपोर्टिंग में सच्चाई होने से भी इनकार किया है।
पिता के फैसले पर बेटी को गर्व
सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप शर्मा के इस फैसले को उनके परिवार का भी पूर्ण समर्थन मिला है।
- बेटी का बयान: शर्मा की बेटी तानिया शर्मा ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें अपने पिता के फैसले पर गर्व है। तानिया ने भावुक होते हुए कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। कोई रातोंरात बेघर कैसे हो सकता है? वह (डैंग) मेरे लिए भाई जैसे हैं। सिर्फ़ मैं ही नहीं, मेरा परिवार और पूरा समुदाय सब उनके साथ खड़े हैं।”
जम्मू की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता की राजनीति और सांप्रदायिक तनाव के शोर में भी मानवता, प्रेम और भाईचारा आज भी ज़िंदा है। कुलदीप शर्मा ने न केवल एक बेघर पत्रकार को सहारा दिया है, बल्कि राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत किया है।










