सांसद वीरेंदर सिंह ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कहा ‘दालमंडी के प्रभावित लोगो को थाने पर बुला कर धमकाया जा रहा, पीएम मोदी के इशारे पर हमे दालमंडी सहित अन्य कार्यक्रमों में नहीं जाने दिया गया, सदन में उठायेगे मुद्दा’

वाराणसी में दालमंडी के प्रभावितों को लेकर सांसद वीरेंद्र सिंह ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं! सांसद ने दावा किया है कि दालमंडी विवाद के पीड़ितों को थाने पर बुलाकर धमकाया जा रहा है। इससे भी बड़ा आरोप यह है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के इशारे पर दालमंडी और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में जाने से रोका जा रहा है। वीरेंद्र सिंह ने साफ कर दिया है कि वह इस गंभीर मुद्दे को सदन (पार्लियामेंट) में उठाएंगे। जानिए, सांसद के आक्रामक रुख के पीछे की पूरी कहानी।

शफी उस्मानी

वाराणसी: चंदौली से सपा सांसद वीरेंदर सिंह को कल बृहस्पतिवार के दिन उनके तीन प्रस्तावित कार्यक्रमों जिसमे दालमंडी के प्रभावितों से भेट, पंडित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती रेप पीडिता 4 साल की मासूम बच्ची के परिजनों से मुलाकात तथा चुनार रेल दुर्घटना में मृतकों के परिजनों से मुलाकात का कार्यक्रम था, में शामिल होने से वाराणसी पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने के मुद्दे पर राष्ट्रपति को पत्र प्रेषित कर अपना दर्द बयान करते हुवे कहा है कि वह इन सभी मुद्दों को सदन में उठायेगे।

पत्र में उन्होंने दालमंडी का ख़ासा ज़िक्र करते हुवे लिखा है कि प्रभावितों को थाने पर बुलाकर उन्हें धमकी दी जा रही है और डराया जा रहा है। साथ ही सांसद ने प्रधानमन्त्री पर आरोप लगाया है कि वह निष्पक्ष होकर कार्य नही कर रहे है और उनके ही इशारे पर प्रशासन ने उन्हें उनके प्रस्तावित कार्यक्रमों में नहीं शामिल होने दिया है। सांसद वीरेंदर सिंह ने अपने पत्र में वाराणसी के बुनकरों का भी मुद्दा उठाते हुवे उनके लिए टेक्सटाइल पार्क बनवाने की मांग किया है। सांसद ने पत्र प्रेषित करते हुवे इसकी प्रति मीडिया को उपलब्ध करवाया है।

सांसद वीरेंदर सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि ‘आज दिनांक 6 नवम्बर 2025 को वाराणसी जनपद के दालमंडी बाज़ार में प्रभावित व्यापारियों तथा सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई। मुलाकात के दौरान भारत सरकार के प्रधानमंत्री एवं वाराणसी संसदीय क्षेत्र के माननीय सांसद श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा दिए गए निर्देशन के अनुसार उनकी कठिनाइयो को बिना जाने समझे सड़क चौडीकरण के नाम पर उनका उत्पीडन बिना उचित मुआवजा एवं वर्षो से स्थापित व्यापार के बिना विस्थापन प्रक्रिया के उजाड़ा जा रहा है और अधिकारियो के माध्यम से रात के 11 बजे से 11 बजे तक थाने पर बुलाकर उन्हें धमकाया जा रहा है। यह बड़ा ही चिंता का विषय है।’

पत्र में आगे लिखा है कि ‘वाराणसी की जनता ने बड़ी ही अपेक्षा और आशा से अपने सांसद श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी का चुनाव किया। भगवान शंकर की कृपा एवं माँ गंगा के आशीर्वाद से वाराणसी संसदीय क्षेत्र का सांसद हमारे देश का प्रधानमंत्री हुआ। परन्तु दुर्भाग्य यह है कि यह प्रधानमंत्री समूचे देश, समाज एवं दलों से ऊपर उठ कर पूर्व प्रधानमंत्रियो के भांति सम्मान व्यवहार से समाज के सभी वर्गों एवं नागरिको के सेवा व बनारस का विकास नही कर रहे है। ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री सिर्फ एक दल के प्रधानमंत्री होकर रह गए है। इसलिए काशी के प्रचलित स्वरुप एवं प्रचलित उद्योगों को समाप्त करने एवं काशी के पहचान और उसके स्वरुप के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया जा रहा है।’

पत्र में काशी की संस्कृति का ज़िक्र करते हुवे लिखा है कि ‘काशी की पहचान, काशी की परंपरा, काशी की गंगा जमुनी तहजीब, काशी की गली और काशी के घाटो तथा माँ गंगा के मूल्यांकित होती है। काशी में छोटे छोटे उद्योगों के ज़रिये काशी की दालमंडी गली, हड़हा सराय, चौखम्भा कश्मीरीगंज, पानदरीबा, गोला दीना नाथ, शमशान घाट आदि ठोक एवं फुटकर व्यापारियों का सैकड़ो वर्ष पुराना संसथान बना हुआ था। अभी हमारी 70 फीसद से ऊपर गाँव एवं शहर में रहने वाली गरीब जनता के बच्चे के प्लास्टिक एवं लकड़ी के छोटे छोटे खिलौनों के द्वारा उनको मनोरंजन का साधन गरीब समाज उपलब्ध करवाता है। और उन सबकी औकात नही है कि इलेक्ट्रोनिक खिलौनों के ज़रिये अपने बच्चो के मनोरंजन का साधन उपलब्ध करवा सके। इसे संरक्षित करने की ज़रूरत है, न कि उजाड़ने की।’

पत्र में सांसद वीरेंदर सिंह ने लिखा है कि ‘अतः माननीय प्रधानमंत्री जी से अनुरोध है कि काशी की संवेदनशीलता को पहचानने तथा उन छोटे छोटे कुटीर उद्योगों को संरक्षित करे। और सबसे बड़ी ज़रूरत जो काशी को है वह यहाँ पर लाखो की संख्या में समस्त पूर्वांचल में रहने वाले गरीब बुनकरों को बाज़ार उपलब्ध करवाने हेतु टेक्सटाइल पार्क बनाया जाए ताकि समस्त पूर्वांचल में साडी उद्योग से जुड़े हुवे बुनकर समाज को एक बाज़ार मिल सके। जहाँ तक आवागमन की समस्या है उसे दूर करने हेतु काशी में मेट्रो ट्रेन चलाया जाए। इसके साथ साथ तात्कालिक घटना जैसे 4 वर्ष उम्र की बच्ची के बलात्कार के मामले में पंडित दींन दयाल उपाध्याय हॉस्पिटल पाण्डेयपुर में उसका हाल जानने हेतु उसके परिजनों से मिलने का कार्यक्रम था। चुनार में हुवे रेल हादसे में 6 नागरिको की मृत्यु होने पर उसके प्रति उनके परिवार से मिल कर संवेदना व्यक्त करने का कार्यक्रम था।’

उन्होंने लिखा कि ‘परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि जिला प्रशासन देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे देश के प्रधानमंत्री के दबाव में हमे अपने कर्तव्यों के पालन हेतु पीडितो से मिलने हेतु जाने पर रोक रहा है। जो लोकतंत्र में किसी भी दशा में जायज़ नहीं है। हम सब उन मामले को आने वाले लोकसभा के समय उसमे सभी प्रकरणों को सदन में देश के सामने भाजपा द्वारा किये जा रहे इस अलोकतांत्रिक कार्यवाही को उजागर करूँगा।’

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