‘दिल्ली की हवा ज़हरीली, PM चुप क्यों?’ राहुल गांधी ने संसद में उठाई प्रदूषण पर विस्तृत चर्चा की मांग

ईदुल अमीन
PNN24 न्यूज़, नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की जानलेवा वायु प्रदूषण की समस्या ने अब संसद के गलियारों में बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए मांग की है कि सरकार इस ‘स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति’ (Health Emergency) पर संसद में विस्तृत चर्चा करे। राहुल गांधी ने सवाल उठाया है कि जब दिल्ली की हवा हर साल ज़हरीली हो जाती है, तो प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं और इस राष्ट्रीय संकट पर गंवेदनशील बयान क्यों नहीं दे रहे हैं।
‘हेल्थ इमरजेंसी’ पर पीएम की चुप्पी क्यों?
राहुल गांधी ने अपनी मांग के साथ कई कड़े सवाल उठाए हैं, जो दिल्ली और एनसीआर (NCR) के करोड़ों निवासियों की चिंताएं दर्शाते हैं।
- गंभीरता पर सवाल: राहुल गांधी ने कहा कि, “दिल्ली की हवा अब साँस लेने लायक नहीं रही। यह एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट है, जिसके कारण बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। ऐसी ‘हेल्थ इमरजेंसी’ की स्थिति पर प्रधानमंत्री की चुप्पी क्यों है?”
- राष्ट्रीय शर्मिंदगी: उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में भारत की राजधानी को सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है, जो हमारे देश के लिए शर्मिंदगी का विषय है।
- ठोस समाधान की मांग: राहुल गांधी ने कहा कि यह समय सियासत करने का नहीं, बल्कि गंभीर और ठोस समाधान खोजने का है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ मिलकर दीर्घकालिक योजना बनाने की मांग की।
पराली और राजनीति से ऊपर उठने की ज़रूरत
विपक्ष के नेता ने माना कि प्रदूषण की समस्या सिर्फ दिल्ली सरकार के नियंत्रण में नहीं है, बल्कि इसके लिए पड़ोसी राज्यों और केंद्र सरकार के समन्वय की जरूरत है।
- सदन में चर्चा: राहुल गांधी ने मांग की है कि सदन में सभी दलों के सांसद इस विषय पर गंभीरता से चर्चा करें और विशेषज्ञों की राय लें।
- पराली से आगे: उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदूषण के लिए केवल पराली (Stubble Burning) को दोष देना बंद करना चाहिए और उद्योगों, वाहनों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण के लिए एक कठोर नीति लानी चाहिए।
सरकार पर बढ़ा दबाव
राहुल गांधी द्वारा सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष की मांग को स्वीकार करती है और इस गंभीर स्वास्थ्य संकट पर सदन में विस्तृत और निर्णायक चर्चा करती है। दिल्ली का दम घुट रहा है और जनता को अब केवल बयानों की नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा में साँस लेने के अधिकार की जरूरत है।











