उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में ‘बगावत’…! बेटे को मंत्री बनाने के बाद इस्तीफ़ों की झड़ी, असंतोष चरम पर

आफताब फारुकी
PNN24 न्यूज़, पटना (बिहार)। बिहार की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा के लिए सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खबर है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में इस्तीफ़ों की झड़ी लग गई है, और इस अंतरकलह (Internal Strife) का मुख्य कारण उनके बेटे को हाल ही में राज्य सरकार में मंत्री बनाया जाना है। पार्टी के कई पुराने और वरिष्ठ नेता इस फैसले से गहरे असंतोष में हैं और इसे वंशवाद (Dynastic Politics) का बढ़ावा मान रहे हैं।
क्या है पार्टी में ‘बगावत’ की वजह?
उपेंद्र कुशवाहा ने हाल ही में अपने बेटे को नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में मंत्री पद दिलवाया था। यह फैसला तुरंत पार्टी के भीतर विवाद का कारण बन गया।
- वरिष्ठों की उपेक्षा: पार्टी के कई पुराने और मेहनती नेता जो वर्षों से उपेंद्र कुशवाहा के साथ संघर्ष करते रहे हैं, उनका मानना है कि वंशवाद को बढ़ावा देते हुए योग्य और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा की गई है।
- इस्तीफ़ों का सिलसिला: बेटे को मंत्री बनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद, पार्टी के कई प्रमुख पदाधिकारियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया। इनमें जिलाध्यक्ष, प्रदेश उपाध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर बैठे नेता शामिल हैं।
- नेतृत्व पर सवाल: इस्तीफा देने वाले नेताओं ने खुले तौर पर कुशवाहा के नेतृत्व की शैली पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अब पार्टी सिद्धांतों से भटक गई है।
सियासत में वंशवाद का गहरा असर
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी में यह असंतोष उस समय आया है जब वह बिहार में NDA गठबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अपनी पार्टी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
- सत्ता का लालच: असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि मंत्री पद दिलवाने का यह कदम परिवारवाद और सत्ता के लालच को दिखाता है, जबकि पार्टी का गठन सामाजिक न्याय और पिछड़ों की राजनीति के आधार पर हुआ था।
- पार्टी की कमजोरी: इस्तीफ़ों की यह झड़ी राष्ट्रीय लोक जनता दल को चुनावी मौसम से ठीक पहले कमजोर कर सकती है। यह घटनाक्रम विपक्ष को हमला करने का एक बड़ा मौका दे सकता है।
कुशवाहा का बचाव और डैमेज कंट्रोल
फिलहाल, उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से इन इस्तीफ़ों और असंतोष पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है।
- खंडन की कोशिश: माना जा रहा है कि कुशवाहा और उनके करीबी नेता डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं और जल्द ही इन आरोपों का खंडन कर सकते हैं। वे शायद यह तर्क दें कि बेटे को मंत्री पद योग्यता के आधार पर मिला है, न कि परिवारवाद के कारण।
लेकिन यह साफ है कि उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के अंदर की यह ‘बगावत’ बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय खोल रही है। अब देखना यह होगा कि कुशवाहा अपनी पार्टी को टूटने से कैसे बचाते हैं।











