अँखियन देखी और कनियन सुनी: चेतगंज के पानदरीबा चौकी के पुलिस कर्मियों का फरमान, ‘अब रात हो गई, चौकी अन्दर से बंद कर के आराम बड़ी चीज़ है मुह ढक के सोईये’

तारिक आज़मी

वाराणसी: उत्तर प्रदेश पुलिस की टैग लाइन है ‘आपकी सेवा में सदैव तत्पर’। परन्तु लगता है कि चेतगंज थाने के पानदरीबा पुलिस चौकी पर तैनात रात की ड्यूटी आरक्षी कृष्ण यादव और ब्रह्मानंद के लिए ये सब नहीं बना है। एक तो साहब इनके लिए बुरे होते है कि ‘नाईट’ लगा देते है। चलो कोई बात नहीं नाईट लगी है तो ‘भाई आराम बड़ी चीज़ है, पुलिस चौकी अन्दर से बंद कर मुह ढक के सोइए।’

मामला आँखों देखा और कानो सुना है। कल बुद्धवार की गहरी रात थी और घडी बता रही थी कि अब बुद्धवार खत्म हो चूका है और बृहस्पतिवार लग चूका है। पानदरीबा चौकी के बगल में मामूल के हिसाब से रात्रिचर चाय के शौक़ीन चाय का लुत्फ़ ले रहे थे, और पुलिस चौकी के अन्दर अँधेरा था। पास ही दो पक्ष आपस में एक दुसरे से गुंडा बनने की कोशिश कर रहे थे। ‘तेरी माँ, तेरी बहन’ का आदान प्रदान दोनों तरफ से शुरू था। आवाज़े तेज़ थी तो आसपास के लोग भी उनको देख रहे थे।

स्थिति ऐसी थी कि लगता था कि अब ढिशुम ढिशुम हुई तो तब ढिशुम ढिशुम हुई। पुलिस चौकी के अन्दर से बंद कपाट और बंद बत्ती ये बात बता रही थी कि चौकी फिलहाल आराम कर रही है। हमने अन्दर झाँक कर देखा तो दो पुलिस कर्मी आराम से सो रहे थे। तभी एक सज्जन को लगा कि आपसी विवाद बढ़ न जाए तो वह सज्जन पुलिस को सूचित करके अपने अच्छे नागरिक होने की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए बढ़ गए। उन्होंने दरवाज़ा पुलिस चौकी का खटखटाया तो सो रहे दोनों आरक्षी जिनके नाम क्रमशः कृष्ण यादव और ब्रह्मानंद बताया जाता है कि नींद में खलल पड़ गया।

बड़े बेमन से दरवाज़ा खुलता है और दोनों सिपाही कड़क कर कहते है कि ‘बोलो क्या हुआ?’ अब सज्जन तनिक चिहुक गए और चिघुद भी गए कि अरे गुरु गलती हो गई का? साहब लोगन के नींद में खलल डाल दिया। उन्होंने आहिश्ता से कहा कि ‘दो लोग आपस में लड़ रहे है, विवाद बढ़ सकता है।’ बस सिपाही जी का पारा सातवे आसमान पर चला गया और उन्होंने तुरंत कहा ‘अबे तो तुमसे क्या मतलब तुम जाओ और मारपीट हो रही है तो जाकर 112 पर फोन कर दो। वो आएगी। नींद ख़राब कर दिया।’ यह कहते हुवे दरवाज़ा सज्जन के मुह पर बंद था। वह अपनी इज्जत की टोकरी उठाते हुवे धीरे से अपनी बाइक उठाते है और गंतव्य को चले जाते है।

हमारे पूरवा में मिली चाय ख़त्म हो चुकी थी। हमने अपने पूर्वे को डांस करवाता हुआ डस्टबिन के हवाले किया। तब तक दोनों पक्षों में दो चार हाथो का लेनदेन हो चूका था और आसपास के लोगो ने छुड़ा दिया था। बाइक से चलते वक्त मैंने दूर से ही एक तस्वीर पुलिस चौकी की ले लिया क्योकि हमको अपनी इज्ज़त प्यारी थी, मुझसे अगर सिपाही कुछ बोलते तो मेरे ही सम्मान को ठेस पहुच जाता। धीरे से तस्वीर लेकर अपने घर की कदम बाइक बढ़ा लिया।

वैसे ये दोनों वही सिपाही बताये जाते है जिसने आसपास के चाय पान वाले भी परेशान है। मुफ्त का खाना और अगर गलती से दुकानदार ने पैसे मांग लिए तो गाली देने के लिए ख़ासा विश्व रिकार्ड बना रखा है। इसके पूर्व शिकायत पर इनको थाने से अटैच किया गया था। मगर इस्पेक्टर के ट्रांसफर होते ही साहब लोग वापस अपनी पसंदीदा पुलिस चौकी पर आ गए क्योकि यही एक चौकी ऐसी है जिसमे वाहन की कथित चेकिंग के नाम पर लक्सा थाना क्षेत्र से भी वाहन पकड़ कर जेब की ठंडक दूर किया जा सकता है।

तो हमने सोचा तनिक अपनी अखियन से देखी हुई और कनियन से सुनी हुई आपको भी बताते चले। भाई देखे हम तो ऐसे ही है। साफ़ साफ़ बता देते है और न लगाई न लापट। इनसे मुह लग कर अपनी इज्ज़त गवाने का क्या फायदा है? बड़े बुज़ुर्ग कह कर गए है कि अपनी इज्ज़त अपने हाथो होती है। तो अपनी इज्ज़त को संभाल कर रखे। अगर ये दोनों साहब लोग सोते हुवे मिले तो कृपया ढेर सज्जन बन कर उनको जगाने का प्रयास न करे, अन्यथा इज्ज़त के लिए हानिकारक होता है। लोग जनहित की बात करते है। वैसे हमने बता दिया, बकिया आपकी मर्ज़ी….

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