अरावली विवाद: जयपुर में ‘Gen Z’ का हल्लाबोल, चौतरफा विरोध के बाद केंद्र का बड़ा फैसला— अरावली में नई माइनिंग लीज़ पर पूरी तरह रोक

मो0 सलीम
जयपुर/नई दिल्ली: अरावली पहाड़ियों की ‘नई परिभाषा’ को लेकर जारी विवाद अब सड़कों पर पहुँच गया है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में बड़ी संख्या में युवाओं (जेन ज़ी) ने प्रदर्शन कर अरावली को बचाने की गुहार लगाई। इस बढ़ते राष्ट्रव्यापी विरोध के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूरी अरावली पर्वत शृंखला में नई माइनिंग लीज़ देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

क्या है ‘नई परिभाषा’ का पेंच? सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई परिभाषा के अनुसार:
- ऊँचाई: केवल आसपास की जमीन से 100 मीटर (328 फीट) ऊँचे हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा।
- दूरी: दो पहाड़ियाँ तभी शृंखला का हिस्सा मानी जाएंगी जब वे 500 मीटर के दायरे में हों। पर्यावरणविदों का तर्क है कि यह परिभाषा अरावली के एक बड़े हिस्से को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर देती है।
केंद्र सरकार का यू-टर्न और सख्त निर्देश: बढ़ते विवाद को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने राज्यों को कड़े निर्देश दिए हैं कि:
- अरावली क्षेत्र में किसी भी नई माइनिंग लीज़ (Mining Lease) देने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
- यह प्रतिबंध पूरी अरावली पर समान रूप से लागू होगा, चाहे पहाड़ी की ऊँचाई 100 मीटर हो या उससे कम।
सरकार के इस फैसले को प्रदर्शनकारी युवाओं और विशेषज्ञों के दबाव के रूप में देखा जा रहा है, जो अरावली के इकोसिस्टम को माइनिंग माफिया से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
अरावली विवाद: 3 मुख्य बिंदु
- विरोध क्यों: 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों को ‘गैर-पहाड़ी’ घोषित किए जाने का डर।
- युवाओं की मांग: अरावली को केवल ऊँचाई नहीं, बल्कि पर्यावरण के महत्व पर परिभाषित किया जाए।
- सरकार की राहत: फिलहाल नई माइनिंग लीज़ पर रोक लगाकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश।










