राहत! भीमा कोरेगांव केस: पूर्व DU प्रोफेसर हनी बाबू को बॉम्बे हाई कोर्ट से ज़मानत, 5 साल से थे जेल में

फारुख हुसैन
PNN24 न्यूज़, मुंबई। भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले (Bhima Koregaon-Elgar Parishad case) में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू को ज़मानत (Bail) दे दी है। इस फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है, क्योंकि वे पाँच साल से अधिक समय से जेल में बंद थे और ट्रायल शुरू होने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी।
लंबी क़ैद के बाद मिली राहत
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की पीठ ने हनी बाबू की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
- पिछला फैसला: हाई कोर्ट ने इससे पहले 2022 में हनी बाबू की ज़मानत अर्जी को खारिज कर दिया था।
- हनी बाबू की दलील: उन्होंने कोर्ट में दलील दी थी कि वह पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं और मामले का ट्रायल जल्द पूरा होने की कोई संभावना नहीं है। इस केस में 15 से अधिक अभियुक्तों पर UAPA के तहत आरोप लगे हैं, जिससे ट्रायल लंबा खिंचने की आशंका है।
- लिखित आदेश लंबित: हालांकि, हाई कोर्ट के इस आदेश की लिखित प्रति (Written Order) अभी अपलोड नहीं की गई है, जिससे ज़मानत की शर्तों और कारणों का विस्तृत ब्यौरा सामने आना बाकी है।
क्या हैं हनी बाबू पर आरोप?
हनी बाबू उन 15 एक्टिविस्टों, शिक्षाविदों और वकीलों में शामिल हैं जिन पर भीमा कोरेगांव मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- जातीय तनाव भड़काना: आरोप है कि इन लोगों ने जनवरी 2018 में पुणे के पास जातीय तनाव भड़काया था।
- UAPA के तहत आरोप: इन पर अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ‘आतंकवाद’ से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
- प्रतिबंधित संगठन से संबंध: इनमें प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) से संबंध और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित हत्या की साज़िश जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
हाई कोर्ट का यह फैसला ऐसे कई अन्य आरोपियों के लिए भी उम्मीद की किरण हो सकता है, जो बिना किसी ट्रायल के लंबे समय से जेलों में बंद हैं।









